नन्ही परी

18 मार्च 2019   |  सौरभ शर्मा   (72 बार पढ़ा जा चुका है)


जिंदगी की खिड़की पे सुबह हुई,

खुशियों की एक किरण हमें जगाने आई है।


ख्वाबों के फूल खिलते हैं यहां,

इस बागबान को मोहब्बत से सजाने आई है।


यादों को भुला देते हैं हम वक्त के साथ चलते हुए

अब हर लम्हें को यादगार बनाने आई है।


जिंदगी में कोई कमीं महसूस ना हुई हमें,

अब सच्ची खुशियों का राज बताने आई है।


हारी-थकी हुई थी मुस्कान हमारी,

एक नन्ही परी फुरसत से हंसाने आई है।

अगला लेख: जिंदगी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 मार्च 2019
#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#नारी के हालात नहीं बदले,हालात अभी, जैसे थे पहले,द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने वाले,अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,कलयुग में अपनी रूप बदल ले।लक्ष्य कठिन है, फिर भी
07 मार्च 2019
10 मार्च 2019
या
शाम को ऑफिस से घर जा रहा था कि तभी चिलचिलाती गर्मी के दरवाजे पर मानसून ने दस्तक दी। बारिश होने लगी और सड़क पर चलते लोग बचने के लिए आड़ ढूंढने लगे। मगर मुझे कुछ अलग महसूस हुआ ऐसा लगा कि जैसे इस पल को मैं पहले जी चुका हूं। फिर कुछ पल याद आए जो आज फिर से जीवंत होते लगने लगे। दोस्तों के साथ बिताए पल
10 मार्च 2019
12 मार्च 2019
मे
किसी ने उसे हिंदु बताया,किसी ने कहा वो मुसलमान था,खुद को मौत की सजा सुनाई जिसने,वो मेरे देश का किसान था।जिसकी उम्मीदाें से कहीं नीचा आसमान था,मुरझाकर भी उसका हौंसला बलवान था,जब वक्त ने भी हिम्मत और आस छोड़ दी,उस वक्त भी वो अपने हालातों का सुल्तान था।किस्मत उसकी हारी हुई बाजी का फरमान था,बिना मांस की
12 मार्च 2019
16 मार्च 2019
मैं करती हूँनृत्यदोनों हाथ ऊपरउठाकर, आकाश की ओरभर लेने कोसारा आकाश अपने हाथों में |चक्राकार घूमतीहूँ कई आवर्तनघूमती हूँ गतों और परनोंके, तोड़ों और तिहाइयों के |घूमते घूमते बनजाती हूँ बिन्दु हो जाने को एक ब्रह्माण्ड केउस चक्र के साथ |खोलती हूँ अपनीहथेलियों को ऊपर की ओर बनाती हूँनृत्य की एक मुद्रादेने
16 मार्च 2019
18 मार्च 2019
शु
ऐ ! मेरे मधुमेह !तुमने दी मेरी ज़िन्दगी बदल, खाने, पीने और रहने में जब दी तुमने दख़ल । मैं जी रही थी बेख़बर ,स्वास्थ्य की थी न कदर। जब तुमने ताकीद दी, शुरू अपनी परवाह की ।जीने का आया कुछ सलीका, अपनाया योग का भी तरीका। अब खुद को भी देती समय, जीवन
18 मार्च 2019
15 मार्च 2019
जि
जिंदगी एक मौका है कुछ कर दिखाने का,एक बढ़िया रास्ता है खुद को आजमाने का,मत डरना कभी सामने आई मुसीबत से,कुदरत का इंसान पर किया एहसान जिंदगी है।धर्म-जात में बाँट दिया संसार को कुछ शैतानों ने,दिलों को बाँट दिया नफरत की हदों से,सहुलियत के लिए बनाई थी ये सरहदें हमने,मगर इंसान को मिली असली पहचान जिंदगी है।
15 मार्च 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x