इतिहास ज्वलंत हो जाए

26 मार्च 2019   |  Arshad Rasool   (46 बार पढ़ा जा चुका है)

इतिहास ज्वलंत हो जाए

देश का इतिहास ज्वलंत हो जाए,

आतंकवाद का जब अंत हो जाए।

मनाएं हम सब मिल कर खुशियां,

फिर तो हर ऋतु बसंत हो जाए।

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हम हारे नहीं कभी दुष्टों से दुख - संतापों से ! स ! हम हारे हैं छुपे हुए कुछ ऑस्तीन के साँपो से

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