चतुष्पदी

28 मार्च 2019   |  महातम मिश्रा   (44 बार पढ़ा जा चुका है)


"चतुष्पदी"


बहुत याद आओगे तुम प्यारे गुलशन।

बहारों की बगिया खुश्बुओं के मधुबन।

कभी भूल मत जाना प्यारी सी चितवन।

माफ करना ख़ता तुम हो न्यारे उपवन।।-1


याद आएगी कल प्यारी पनघट सखी।

खुश्बुओं से महकता ये गुलशन सखी।

मेरी यादों के चितवन में छाएगी सखी।

माफ़ करना ख़ता मन न अनबन सखी।।-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: छंदमुक्त काव्य



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 मार्च 2019
अरविंद सवैया[ सगण ११२ x ८ +लघु ] सरल मापनी --- 112/112/112/112/112/112/112/112/1"अरविंद सवैया"ऋतुराज मिला मधुमास खिला मिल ले सजनी सजना फगुहार।प्रति डाल झुकी कलियाँ कुमली प्रिय फूल फुले महके कचनार।रसना मधुरी मधुपान करे नयना उरझे हरषे दिलदार।अँकवार लिए नवधा ललिता अँग
23 मार्च 2019
31 मार्च 2019
मु
"मुक्तक" चढ़ा धनुष पर बाण धनुर्धर, धरा धन्य हरियाली है।इंच इंच पर उगे धुरंधर, करती माँ रखवाली है।मुंड लिए माँ काली दौड़ी, शिव की महिमा है न्यारी नित्य प्रचंड विक्षिप्त समंदर, गुफा गुफा विकराली है।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
31 मार्च 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x