चतुष्पदी

28 मार्च 2019   |  महातम मिश्रा   (25 बार पढ़ा जा चुका है)


"चतुष्पदी"


बहुत याद आओगे तुम प्यारे गुलशन।

बहारों की बगिया खुश्बुओं के मधुबन।

कभी भूल मत जाना प्यारी सी चितवन।

माफ करना ख़ता तुम हो न्यारे उपवन।।-1


याद आएगी कल प्यारी पनघट सखी।

खुश्बुओं से महकता ये गुलशन सखी।

मेरी यादों के चितवन में छाएगी सखी।

माफ़ करना ख़ता मन न अनबन सखी।।-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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