मुक्तक

31 मार्च 2019   |  महातम मिश्रा   (20 बार पढ़ा जा चुका है)

"मुक्तक"


चढ़ा धनुष पर बाण धनुर्धर, धरा धन्य हरियाली है।

इंच इंच पर उगे धुरंधर, करती माँ रखवाली है।

मुंड लिए माँ काली दौड़ी, शिव की महिमा है न्यारी

नित्य प्रचंड विक्षिप्त समंदर, गुफा गुफा विकराली है।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: छंदमुक्त काव्य



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 मार्च 2019
मु
आप व आप के पूरे परिवार को मुबारक हो फागुन की होली......."मुक्तकमुरली की बोली और राधा की झोली।गोपी का झुंड और ग्वाला की टोली।कान्हा की अदाएं व नंद जी का द्वार-पनघट का प्यार और लाला की ठिठोली।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
23 मार्च 2019
23 मार्च 2019
मु
आप व आप के पूरे परिवार को मुबारक हो फागुन की होली......."मुक्तकमुरली की बोली और राधा की झोली।गोपी का झुंड और ग्वाला की टोली।कान्हा की अदाएं व नंद जी का द्वार-पनघट का प्यार और लाला की ठिठोली।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
23 मार्च 2019
11 अप्रैल 2019
छं
"विधा-छंदमुक्त" रूठकर चाँदनी कुछ स्याह सी लगीबादल श्वेत से श्याम हो चला हैक्या पता बरसेगा या सुखा देगाहै सिकुड़े हुए धान के पत्तों सी जिंदगीउम्मीद और आशा से हो रही है वन्दगीआज की मुलाकात फलाहार सी लगीरूठकर चाँदनी कुछ स्याह सी लगी।।वादे पर वादे सफेद झूठ की फलीक्वार के धूप में श्याम हुई सुंदरीअरमानों क
11 अप्रैल 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
कु
07 अप्रैल 2019
ता
28 मार्च 2019
गी
07 अप्रैल 2019
कु
31 मार्च 2019
28 मार्च 2019
11 अप्रैल 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x