कौन दिखे ये अल्हड किशोरी सी

06 अप्रैल 2019   |  रेणु   (47 बार पढ़ा जा चुका है)

कौन दिखे  ये अल्हड किशोरी सी  - शब्द (shabd.in)

चंचल नैना . फूल सी कोमल ,

कौन दिखे ये अल्हड किशोरी सी ?

रूप - माधुरी का महकता उपवन -

लगे निश्छल गाँव की छोरी सी !


मिटाती मलिनता अंतस की

मन प्रान्तर में आ बस जाए

रूप धरे अलग -अलग से -

मुग्ध, अचम्भित कर जाए

किसी पिया की है प्रतीक्षित --

लिए मन की चादर कोरी सी ! !


तेरी चितवन में उलझा मनुवा -

तनिक चैन ना पाए

यही ज्योत्स्ना चुरा के चंदा

प्रणय का रास रचाए ;

रंग ,गंध , सुर में वास तेरा -

तू सृष्टि की रंगीली होरी सी ! ! ! !


अनुराग स्वामिनी मनु की -

तुम हो नटखट शतरूपा सी

शारदा तुम्हीं लक्ष्मी , सीता-

शिव की शक्ति स्वरूपा सी ;

अपने श्याम सखा में व्याप्त

तुम्हीं राधिका गोरी सी !!


सृष्टा की अनुपम रचना

तुझ बिन सूना जग का आँगन -

धरे धरा सा संयम -

है विकल जिया का अवलम्बन

शुचिता . तुम्ही स्नेह ,करुणा

तुम माँ की मीठी लोरी सी !!!!!!!!!!

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अगला लेख: फूल ! तुम खिलते रहना !



बेहद प्यारी रचना

बेहद सुन्दर रचना

बेहतरीन लेखन

रेणु
13 अप्रैल 2019

आभार और शुक्रिया आदरणीय पुरुषोत्तम जी

अलोक सिन्हा
07 अप्रैल 2019

बहुत सरस् नव गीत है |

रेणु
07 अप्रैल 2019

सादर आभार आदरणीय आलोक जी

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