मुक्तक

07 अप्रैल 2019   |  अलोक सिन्हा   (45 बार पढ़ा जा चुका है)

सच अभी भी मरा नहीं है ,

झूठ भी पर डरा नहीं है |

यह भी सच है आदमी अब ,

पूर्व जैसा खरा नहीं है |

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रेणु
07 अप्रैल 2019

खरे भावों से सजा खरा मुक्तक आदरणीय आलोक जी | आपको बहुत समय बाद सक्रिय देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई | सादर प्रणाम |

अलोक सिन्हा
08 अप्रैल 2019

बहुत बहुत धन्यवाद | आपकी एक सुगठित सरस् रचना देखी तो सोचा कि मैं भी अधिक नहीं तो कुछ थोड़ा सा तो लिख ही दूँ |

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