छंदमुक्त काव्य

11 अप्रैल 2019   |  महातम मिश्रा   (13 बार पढ़ा जा चुका है)


"विधा-छंदमुक्त"


रूठकर चाँदनी कुछ स्याह सी लगी

बादल श्वेत से श्याम हो चला है

क्या पता बरसेगा या सुखा देगा

है सिकुड़े हुए धान के पत्तों सी जिंदगी

उम्मीद और आशा से हो रही है वन्दगी

आज की मुलाकात फलाहार सी लगी

रूठकर चाँदनी कुछ स्याह सी लगी।।


वादे पर वादे सफेद झूठ की फली

क्वार के धूप में श्याम हुई सुंदरी

अरमानों की फसल उगाता है कोई

सूखता है किसान हकीकत के हाथ

राजनीति के पुजारी कुर्सी के साथ

नौटंकी का नायक नायिका की गली

रूठकर चाँदनी कुछ स्याह सी लगी।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: कुंडलिया



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 अप्रैल 2019
गी
, समांत- आम, पदांत- को, मापनी- 2122 2122 1222 12"गीतिका"डोलती है यह पवन हर घड़ी बस नाम को नींद आती है सखे दोपहर में आम कोतास के पत्ते कभी थे पुराने हाथ में आज नौसिखिए सभी पूजते श्री राम को।।राहतों के दौर में चाहतें बदनाम करलग गए सारे खिलाड़ी जुगाड़ी काम को।।किश्त दर किश्त ले आ रहें बन सारथीबैंक चिं
07 अप्रैल 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x