खिली बसंती धुप "

15 अप्रैल 2019   |  सुखमंगल सिंह   (123 बार पढ़ा जा चुका है)

खिली बसंती धुप "

खिल उठी बसंती धुप

फिजा भरी अंगड़ाई

चली हवा सुगन्धित ऐसी

प्रिये जब -जब मुस्कायी |


रूप बदल नित नवीन

श्रृंगार ले रौनक लाई

अधरों मुस्कान रहा

प्रिये जब ली अंगड़ाई | |


मन मलिन कभी हुआ

सम्मुख तब तुम आई

खिली बसंती धुप नई

प्रिये मन मुख मुस्कायी |


हृदय ागुंजित स्वर बेला

मंगल- बुद्धि ठकुराई

प्रेमी प्यासा पौरुष पागल

प्रिये पास जब दिखाई |


सब हुए दीवाने तुम्हारे

जादू कैसा हो चलाई

खिली बसंती धुप नई

प्रिये जब तुम मुस्कायी

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