सांसों का बोझ

30 अप्रैल 2019   |  आयेशा मेहता   (66 बार पढ़ा जा चुका है)

सांसों का बोझ  - शब्द (shabd.in)

वक़्त जितना सीखा रही है ,उतनी तो मेरी साँसें भी नहीं है

देह का अंग-अंग टुटा पड़ा है ,

रूह फिर भी जिस्म में समाया हुआ है ,

मेरे साँसों पर अगर मेरी मर्जी होती ,

तो कबका मैं इसका गला घोंट देती ,

मगर जीने की रस्म है जो मुझे निभाना पर रहा है ,

मेरा मीत जो है गीत भी है ,

साथ चलता है मगर साथ चलता नहीं ,

कहता है प्रीत है तुझसे पर रीत वो निभाता नहीं ,

दो पल का कोई हमराही बन भी जाए ,

इस पार से उस पार तक चले ,ऐसा उनका इरादा नहीं है

सीसा टूटता है बिखड़ जाता है ,

हौसला पल पल टूटकर भी बिखरता नहीं ,

ज्योत हूँ हमेशा जलती रहती हूँ ,

दर्द जो भी है ह्रदय में दफ़न करती रहती हूँ ,

तकदीर को पीछे छोड़कर श्रम को गले से लगायी ,

फिर क्यों मीलों चलकर भी मंजिल को दूर ही पाई ा

अगला लेख: जन्मदिन शेर



basant singh
02 मई 2019

आयसजीआपकीकोसिसलाजवावहै'

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 अप्रैल 2019
"अवसाद" एक ऐसा शब्द जिससे हम सब वाकिफ़ हैं।बस वाकिफ़ नहीं है तो उसके होने से।एक बच्चा जब अपनी माँ-बाप की इच्छाओं के तले दबता है तो न ही इच्छाएँ रह जाती हैं ना ही बचपना।क्योंकि बचपना दुबक जाता है इन बड़ी मंज़िलों के भार तले जो उसे कुछ खास रास नहीं आते।मंज़िल उसे भी पसंद है पर र
30 अप्रैल 2019
29 अप्रैल 2019
राष्ट्र का नेता कैसा हो?जो रहें लिप्त घोटालों में,जिनके चित बसे सवालों में,जिह्वा नित रसे बवालों में,दंगा झगड़ों का क्रेता हो?क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?राष्ट्र का नेता कैसा हो?जन गण का जिसको ध्यान नहीं,दुख दीनों का संज्ञान नहीं,निज थाती का अभिज्ञान नहीं,अज्ञान हृदय में सेता हो,क्या राष्ट्र का नेता
29 अप्रैल 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x