कितनी बाबरी सी लड़की है वो

03 मई 2019   |  आयेशा मेहता   (41 बार पढ़ा जा चुका है)

कितनी बाबरी सी लड़की है वो  - शब्द (shabd.in)

कितनी बाबली सी लड़की है वो ,

उसके दरवज्जे का चिराग हवा बुझा कर चली जाती है ,

और वह जुगनू को सीसे में कैद कर देती है ,

फूलों का रंग तितलियाँ चुरा ले जाती है ,

और वह भँवरे से लड़ बैठती है ,

आखिर कौन उसको समझाए

किसी और की उधारी किसी और पर चुकता करना

ऐसी कोई रिवाज बहीखाते में नहीं लिखी है ,

अगर कोई चुपचाप किसी के हिस्से का हर जुल्मों शितम सह ले

तो शायद वह अपना बदला पूरा समझकर ,

अपने हर गुनाहों का प्रायश्चित कर लेती

अतीत के पन्नो को बंद कर देती ,

लेकिन किसी के गुनाहों की सजा कोई और भुगतता नहीं है ,

ऐसा कोई सजा कानून के पन्नो में लिखा नहीं है ा


अगला लेख: जन्मदिन शेर



रेणु
02 जून 2019

वाह!!! प्रिय आएशा बहुत सुंदर रचना। 👌👌👌👌शाबास। प्यार तुम्हारे लिए।

बेहतरीन रचना

वाह

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 अप्रैल 2019
वक़्त जितना सीखा रही है ,उतनी तो मेरी साँसें भी नहीं है देह का अंग-अंग टुटा पड़ा है ,रूह फिर भी जिस्म में समाया हुआ है ,मेरे साँसों पर अगर मेरी मर्जी होती ,तो कबका मैं इसका गला घोंट देती ,मगर जीने की रस्म है जो मुझे निभाना पर रहा है ,मेरा मीत जो है गीत
30 अप्रैल 2019
05 मई 2019
भीगे एकांत में बरबस -पुकार लेती हूँ तुम्हे सौंप अपनी वेदना - सब भार दे देती हूँ तुम्हे ! जब -तब हो जाती हूँ विचलित कहीं खो ना दूँ तुम्हेक्या रहेगा जिन्दगी मेंजो हार देती हूँ तुम्हे ! सब से छुपा कर मन में बसाया है तुम्हे जब भी जी चाहे तब निहार लेती हूँ तुम्हे बिखर ना जाए कहीं रखना इस
05 मई 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x