कितनी बाबरी सी लड़की है वो

03 मई 2019   |  आयेशा मेहता   (56 बार पढ़ा जा चुका है)

कितनी बाबरी सी लड़की है वो

कितनी बाबली सी लड़की है वो ,

उसके दरवज्जे का चिराग हवा बुझा कर चली जाती है ,

और वह जुगनू को सीसे में कैद कर देती है ,

फूलों का रंग तितलियाँ चुरा ले जाती है ,

और वह भँवरे से लड़ बैठती है ,

आखिर कौन उसको समझाए

किसी और की उधारी किसी और पर चुकता करना

ऐसी कोई रिवाज बहीखाते में नहीं लिखी है ,

अगर कोई चुपचाप किसी के हिस्से का हर जुल्मों शितम सह ले

तो शायद वह अपना बदला पूरा समझकर ,

अपने हर गुनाहों का प्रायश्चित कर लेती

अतीत के पन्नो को बंद कर देती ,

लेकिन किसी के गुनाहों की सजा कोई और भुगतता नहीं है ,

ऐसा कोई सजा कानून के पन्नो में लिखा नहीं है ा


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रेणु
02 जून 2019

वाह!!! प्रिय आएशा बहुत सुंदर रचना। 👌👌👌👌शाबास। प्यार तुम्हारे लिए।

बेहतरीन रचना

वाह

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