तुम मिले कोहिनूर से

05 मई 2019   |  रेणु   (61 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम मिले कोहिनूर से  - शब्द (shabd.in)

भीगे एकांत में बरबस -

पुकार लेती हूँ तुम्हे

सौंप अपनी वेदना -

सब भार दे देती हूँ तुम्हे !


जब -तब हो जाती हूँ विचलित

कहीं खो ना दूँ तुम्हे

क्या रहेगा जिन्दगी में

जो हार देती हूँ तुम्हे !

सब से छुपा कर

मन में बसाया है तुम्हे

जब भी जी चाहे तब

निहार लेती हूँ तुम्हे


बिखर ना जाए कहीं

रखना इसे संभाल के

सुहानी हसरतों का

हसीं संसार देती हूँ तुम्हे !


तुम डुबो दो या

ले चलो साहिल पर इसे

प्यार की कश्ती की

पतवार देती हूँ तुम्हे !


कांच सी दुनिया ये

तुम मिले कोहिनूर से

क्या दूं बदले में ?

बस प्यार देती हूँ तुम्हे !!!


स्वरचित -- रेणु

चित्र -- गूगल से साभार -

इस रचना को मेरे ब्लॉग पर भी पढिये --

https://renuskshitij.blogspot.com/2019/04/blog-post_9.html

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उच्चकोटि की लेखनी से निकली हुई भावपूर्ण कविता बहुत सुंदर

लाजबाब रचना सखी

रेणु
22 जून 2019

प्रिय सखी कामिनी, सस्नेह आभार आपका

हर रचना के साथ और निखार है आपकी लेखनी में

रेणु
06 जून 2019

, सस्नेह आभार आपका प्रिय प्रियंका

बहुत ही सुंदर और मधुर रचना |

रेणु
06 जून 2019

आदरणीय मंजरी दीदी आपने रचना पढ़ी मन को अपार हर्ष हुआ जिसके लिए ह्रदय तल से आभारी हूँ

रेणु जी ! बहुत अच्छी रचना है | बहुत सरस ह्रदय और भावुकता में आकंठ डूबे मन से लिखी हुई | बहुत बहुत बधाई , शुभ कामनाएं |

रेणु
06 जून 2019

,सादर सस्नेह आभार आपका आदरणीय आलोक जी | रचना पर आपकी स्नेहिल और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मेरे लिए विशेष है

लाजवाब रेणु जी! :)

रेणु
06 जून 2019

प्रिय अमितेश जी , सस्नेह आभार आपका

basant singh
05 मई 2019

बहुत अच्छा

रेणु
06 जून 2019

, सस्नेह आभार आपका बसंत जी

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