"अयोध्या - राम"टैम्पल "

19 मई 2019   |  सुखमंगल सिंह   (45 बार पढ़ा जा चुका है)

"अयोध्या - राम"टैम्पल "

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मित्र देश का साथी,

था वह बोल रहा ?

है हमें बनाने को ,

निर्णय मन से लिया |

शिव मंदिर यहाँ पर,

टैंपल राम अयोध्या ||

अजब दीवाना जीवन,

लौटकर आए न आए,

सागर सा यह हृदय,

फूल मरुस्थल खिलाए,

स्वप्न टीसते रहते,

टैंपल राम अयोध्या ||

अच्छे दिन तो आएं !

नई फसल धरतीपर,

फूल जंगल- खिलाएं,

सबकुछ उसकी कृपा,

सृजन संघर्ष ऐसा करें,

टैंपल राम अयोध्या||


एक सी हो साधना,

कभी थके न आराधना,

काल इतिहास मेरा ,

उजाले अँधेरे में लाये,

ज्ञान की भाषा बने,

टैंपल राम अयोध्या||


मुस्कलों से जूझती,

राजनीतिक गंध लिए,

न्याय के दरवाजे पर,

बड़े बड़े ताले हैं पड़े !

संविधान लगते मूक,

टैंपल राम अयोध्या||


रोटी के टुकड़े छोड़,

सोने- चांदी खाने को,

बाग़ - बगीचे लुटेरे,

बौर आम में उलझे,

यादों के फूल महके,

टैंपल राम अयोध्या||


मौन साधना अचर्चित,

दर्द थिरकती लय लेकर,

हर बादल पानी बर्षाये,

सागर का संयम लेकर,

लिख रहे तूफान 'मंगल,

टैंपल राम अयोध्या||'

- सुखमंगल सिंह ,वाराणसी



मैंने आपके लेखों पर निगाह मारी. क्षमा करें, इनमें ज्ञान विज्ञानं कहाँ हैं, मुझे तो नहीं मिला.
स्पष्टीकरण का अनुरोध करूँगा.
वीरेन्द्र गुप्ता

आदरणीय खोज का विषय

आपका स्वागत मंगल जी

हार्दिक आभार प्रियंका शर्मा जी

रचना प्रकाशन हेतु प्रकाशक मंडल को बधाई !

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