याद तुम्हारी -- नवगीत

01 जून 2019   |  रेणु   (16 बार पढ़ा जा चुका है)

याद तुम्हारी -- नवगीत  - शब्द (shabd.in)

मन कंटक वन में-

याद तुम्हारी -

खिली फूल सी

जब -जब महकी

हर दुविधा -

उड़ चली धूल सी!!


रूह से लिपटी जाय-

तनिक विलग ना होती,

रखूं इसे संभाल -

जैसे सीप में मोती ;

सिमटी इसके बीच -

दर्द हर चली भूल सी !!


होऊँ जरा उदास

मुझे हँस बहलाए

हो जो इसका साथ

तो कोई साथ न भाये -

जाए पल भर ये दूर -

हिया में चुभे शूल सी !!


तुम नहीं हो जो पास -

तो सही याद तुम्हारी ,

रहूं मगन मन बीच -

चढी ये अजब खुमारी ;

बना प्यार मेरा अभिमान

गर्व में रही फूल सी !!

मन कंटक वन में-

याद तुम्हारी -


खिली फूल सी !!!!


स्वरचित -रेणु

चित्र---गूगल से साभार --

इस रचना को मेरे ब्लॉग पर भी पढ़ सकते हैं | मेरे ब्लॉग पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है \\

https://renuskshitij.blogspot.com/2019/05/blog-post_40.html?showComment=1559411472632#c8604433237739253646

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मन को छु लेने वाली एक सुंदर रचना |

रेणु
06 जून 2019

आदरणीय आलोक जी इस मंच पर आपका स्नेह मेरा बहुत बड़ा संबल है हार्दिक आभार आपके स्नेहिल शब्दों के लिए

वाह , प्रेम की नई परिभाषा है इसमें . बहुत ही सुन्दर शब्दों से पिरोई गई कविता

रेणु
06 जून 2019

प्रिय प्रियंका - आपके मधुर शब्दों से शब्द नगरी में बहुत दिनों बाद कुछ अपनेपन का एहसास हुआ | हार्दिक आभार आपका

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