कुंडलिया

04 जून 2019   |  महातम मिश्रा   (49 बार पढ़ा जा चुका है)

"कुंडलिया"


बालू पर पदचिन्ह के, पड़ते सहज निशान।

आते- जाते राह भी, घिस देती पहचान।।

घिस देती पहचान, मान मन, मन का कहना।

स्वारथ में सब लोग, भूलते भाई बहना।।

कह गौतम कविराय, नाचता है जब भालू।

गिरते काले बाल, सरकते देखा बालू।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: गीतिका



स्वागतम सर, धन्यवाद

बहुत बढ़िया सर, बहुत गहरा लिखते हैं आप

हार्दिक धन्यवाद सर, स्वागत है आप का, काले बाल जवानी में गिरने लगे और बालू तो मुट्ठी से गिर ही जाता है कितना भी कस कर पकड़ें, बालों का गिरना स्वास्थ्य की कमजोरी को दर्शाता है और बालू को भट्ठी में बंद करने वाले क्या यह नही जानते कि इसे पकड़ना नामुमकिन है, सादर

नमस्ते सर , कई दिन बाद आया तो आपको देखा यहाँ . थोड़ा समझाइये इस पंक्ति का मतलब - गिरते काले बाल, सरकते देखा बालू।।

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 जून 2019
भो
"भोजपुरी गीत"चल चली वोट देवे रीति बड़ पुरानीनीति संग प्रीति नौटंकी भई कहानी.......लागता न लूह, न शरम कौनो बाति केघूमताटें नेता लोग दिन अउर राति केकेके देई वोट केकरा के गरिआईंउठल बाटें कई जनी हवें अपने जाति केलोगवा के मानी त होई जाई नादानीनीति संग प्रीति नौटंकी भई कहानी.......चल चली वोट.....भागु रे पत
06 जून 2019
07 जून 2019
छं
"छंदमुक्त काव्य"गुबार मन का ढ़हने लगा हैनदी में द्वंद मल बहने लगा हैमाँझी की पतवारया पतवार का माँझीघर-घर जलने लगा चूल्हा साँझीदिखने लगी सड़कें बल्ब की रोशनी मेंपारा चढ़ने लगा है लू की धौकनी मेंनहीं रहा जाति-पाति का कोई बंधनजबसे अस्तित्व के लिए बना महा गठबंधनचोर ने लूट लिया मधुरी वाहवाहीचौकीदार की गेट प
07 जून 2019
16 जून 2019
हा
पितृ दिवस पर प्रस्तुत है हालकि छंद, आदणीय पिता श्री को सादर प्रणाम एवं सभी मित्रों को हर्षित बधाई, ॐ जय माँ शारदा!हाकलि छंदपिता दिवस पर प्रण करें, पीर पराई मिल हरें।कष्ट न दें निश्चित करें, मातु पिता ममता भरें।बने पिता की लाठी भी, माता सुख संघाती भी।पूत कपूत नहिं हो ह
16 जून 2019
05 जून 2019
दो
"दोहा"व्यंग बुझौनी बतकही, कर देती लाचारसमझ गए तो जीत है, बरना दिल बेजार।।हँस के मत विसराइये, कड़वी होती बात।व्यंग वाण बिन तीर के, भर देता आघात।।सहज भाव मृदुभासिनी, करती है जब व्यंग।घायल हो जाता चमन, लेकर सातों रंग।।व्यंग बिना बहती नहीं, महफ़िल में रसधार।इक दूजे को नोचकर, देते हैं उपहार।।बड़े-बड़े घंटाल
05 जून 2019
22 मई 2019
सो
सोरठा - सोरठा दोहा का उलटा होता है इस छंद में विषम चरण में ११मात्रा सम चरण में १३ मात्राएँ होती हैं तुकांत विषम चरण पर निर्धारित होता है सम चरण मुक्त होता है ---"सोरठा"गर्मी है जी तेज, आँच आती है घर घरनींद न आती सेज, चुनावी चाल डगर में।।होगी कैसी शाम, सुबह में बहे पसीना।वोट दिलाना राम, संग में दिव्य
22 मई 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x