मुक्तक

11 जून 2019   |  महातम मिश्रा   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

मुक्तक


मेरे ख्याल की मखमली चादर पर आएं तो कभी

सुकून प्रेम का गहना है रहबर आजमाएं तो कभी

इंतजार पर मौन रहता है दिल आँखें झूठ न बोले

मौसम की हवा में मौसमी लाकर इतराएं तो कभी ।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: गीतिका



रचना को मुख्य पृष्ठ पर स्थान प्रदान करने के लिए मंच व मित्रों का दिल से आभारी हूँ

आपका स्वागत है एवं आभार !

anubhav
12 जून 2019

bahut hi sundar lines hai

हार्दिक धन्यवाद सर

हिना
12 जून 2019

ऐसे कोई बुलाए तो कभी ....वाह

स्वागतम आदरणीया, हार्दिक धन्यवाद

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