मुक्तक

11 जून 2019   |  महातम मिश्रा   (68 बार पढ़ा जा चुका है)

मुक्तक


मेरे ख्याल की मखमली चादर पर आएं तो कभी

सुकून प्रेम का गहना है रहबर आजमाएं तो कभी

इंतजार पर मौन रहता है दिल आँखें झूठ न बोले

मौसम की हवा में मौसमी लाकर इतराएं तो कभी ।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: गीत, आंचलिक पुट



रचना को मुख्य पृष्ठ पर स्थान प्रदान करने के लिए मंच व मित्रों का दिल से आभारी हूँ

आपका स्वागत है एवं आभार !

anubhav
12 जून 2019

bahut hi sundar lines hai

हार्दिक धन्यवाद सर

हिना
12 जून 2019

ऐसे कोई बुलाए तो कभी ....वाह

स्वागतम आदरणीया, हार्दिक धन्यवाद

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 जून 2019
मु
"मुक्तक"बहुत मजे से हो रहे, घृणित कर्म दुष्कर्म।करने वाले पातकी, जान न पाते मर्म।दुनिया कहती है इसे, बहुत बड़ा अपराध-संत पुजारी कह गए, पापी का क्या धर्म।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
10 जून 2019
16 जून 2019
हा
पितृ दिवस पर प्रस्तुत है हालकि छंद, आदणीय पिता श्री को सादर प्रणाम एवं सभी मित्रों को हर्षित बधाई, ॐ जय माँ शारदा!हाकलि छंदपिता दिवस पर प्रण करें, पीर पराई मिल हरें।कष्ट न दें निश्चित करें, मातु पिता ममता भरें।बने पिता की लाठी भी, माता सुख संघाती भी।पूत कपूत नहिं हो ह
16 जून 2019
10 जून 2019
मु
"मुक्तक"बहुत मजे से हो रहे, घृणित कर्म दुष्कर्म।करने वाले पातकी, जान न पाते मर्म।दुनिया कहती है इसे, बहुत बड़ा अपराध-संत पुजारी कह गए, पापी का क्या धर्म।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
10 जून 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x