ये आसमान मेरा गला सुख रहा है

20 जून 2019   |  आयेशा मेहता   (44 बार पढ़ा जा चुका है)

ये आसमान मेरा गला सुख रहा है

तप-तप कर यह जल रही है ,

देखो तेरी धरा मर रही है ,

ऐ आसमा मेरा गला सुख रहा है ,

तेरी बेरुखी से मेरा दिल दुःख रहा है ,

मैं प्यासी हूँ , जग प्यासा है ,

देखो इस धरा का कण कण प्यासा है ,

विकल पंछी चोंच खोलकर तुम्हारी तरफ देख रहा है ,

है तुम्ही से मोहब्बत , अपना इश्क़ तो बरसाओ ,

इश्क़ की बारिश से मेरे होंठ को तो भिगाओ ,

यूँ तो बेमौसम भी भिगो जाते हो ,

आज जबकि मेरा दम घूँट रहा है ,

फिर जाना तुम क्यों नहीं आ रहे हो ??

ये आसमां जिद्द छोड़ो अब आ भी जाओ न ,

तुम बेबफा नहीं है मगर अपनी वफ़ा तो निभाओ न ,

अबकी जुदाई लम्बी हुई ,

तुम्हारी चाहत में हरपल आँहें भरते हैं ,

आ जाओ न प्रियवर तुझसे गला मिलकर रोते हैं ❤

अगला लेख: मेरी डायरी



आयशा जी बहुत अच्छी रचना है | बहुत बहुत स्नेह |

आभार आपका

अति सुन्दर

धन्यवाद मनोज जी

कई दिनों बाद आपकी सुन्दर कविता पढ़ने को मिली है, बहुत खूब

धन्यवाद प्रियंका जी

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