तस्वीर

21 जून 2019   |  आयेशा मेहता   (63 बार पढ़ा जा चुका है)

तस्वीर

एक तस्वीर है मेरी आँखों में ,

मैं नहीं जानती यह तस्वीर किसका है ,

शायद ये किसी जनम का एक ख्याली सच है ,

जो हमेशा मेरी तस्वुर में बहता है ,

मैं खुद में रहूँ या न रहूँ ,

मगर यह तस्वीर मुझमें हमेशा रहता है ,

यह तस्वीर भी बेरंग है ,

बिलकुल मेरी ज़िन्दगी की तरह ,

मगर यह चुप नहीं है ,

मेरी ख़ामोशी की तरह

एक रोज ख्याल आया ,

मन के इस तस्वीर को कैनवास पर उतार दूँ

इसका एक स्कैच तैयार कर,

अपने स्टडीरूम के दीवार पर टाँग दूँ

मगर यह क्या !

जिस तस्वीर का जिक्र मेरे अंदर है ,

वह बस एक भ्रम है ,

मेरी ज़िन्दगी की तरह झूठ का एक बबंडर है ❤

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हिना
22 जून 2019

इसे भ्रम केह के इसका अपमान न करे , इसे अपने सपने कहें , और ये सपने भी सच होंगे . कविता आपकी बहुत पसंद आयी

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