दुःख से साक्षात्कार

22 जून 2019   |  कपिल सिंह   (45 बार पढ़ा जा चुका है)

दुःख से साक्षात्कार

बहुत दिन हो गए दुःख को यहाँ आये,
जमाना बीत गया यहाँ पैर फैलाये,
सोचा आज कर ही लेते है दुःख से साक्षात्कार,
पूछ लेते है क्या है इसके आगे के विचार,
हमने पूछा दुःख से थोडा घबरा कर,
वो भी सहम गया हमे अपने पास पाकर,
आजकल काफी पहचाने जा रहे हो,
महंगाई ,गरीबी, गैंगरेप आदि विषयो से चर्चा में आ रहे हो...
दुःख चोंका, फिर सहमा, और मुंह फिरा कर धीरे से बोला...
मुझे पालने पोसने, बड़ा करने में आप लोगो का भी योगदान है...
और उसके पीछे आप लोगो के अपरिवर्तनीय परिवर्तन और संकीर्ण सोच का श्रमदान है।।
मैं स्वयं नहीं चाहता हूँ यहाँ रहना, जाना चाहता हूँ अपने घर...
लेकिन सरकार ने मेरे जाने पर लगा दी रोक और मुझे लिया धर...
कई बार की कोशिश मैंने भागने की,
सारी ताकत लगा दी उन्हॊने मुझे वापस लाने की,
मैं फिर यहाँ रह गया,
मेरा सौतेला भाई सुख भी देखता रह गया,
दुःख की व्यथा सुन कर हम चुप हो गए,
और इस तरह हम दुःख के दोस्त हो गए ।।

बहुत दिन हो गए दुःख को यहाँ आये,

जमाना बीत गया यहाँ पैर फैलाये,

सोचा आज कर ही लेते है दुःख से साक्षात्कार ,

पूछ लेते है क्या है इसके आगे के विचार ,

हमने पूछा दुःख से थोडा घबरा कर ,

वो भी सहम गया हमे अपने पास पाकर ,

आजकल काफी पहचाने जा रहे हो ,

महंगाई ,गरीबी, गैंगरेप आदि विषयो से चर्चा में आ रहे हो ...

दुःख चोंका, फिर सहमा, और मुंह फिरा कर धीरे से बोला ...

मुझे पालने पोसने, बड़ा करने में आप लोगो का भी योगदान है ...

और उसके पीछे आप लोगो के अपरिवर्तनीय परिवर्तन और संकीर्ण सोच का श्रमदान है।।।

मैं स्वयं नहीं चाहता हूँ यहाँ रहना, जाना चाहता हूँ अपने घर ...

लेकिन सरकार ने मेरे जाने पर लगा दी रोक और मुझे लिया धर ...

कई बार की कोशिश मैंने भागने की ,

सारी ताकत लगा दी उन्हॊने मुझे वापस लाने की ,

मैं फिर यहाँ रह गया ,

मेरा सौतेला भाई सुख भी देखता रह गया ,

दुःख की व्यथा सुन कर हम चुप हो गए ,

और इस तरह हम दुःख के दोस्त हो गए ।।

Poetry-Bucket: दुःख से साक्षात्कार

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रेणु
27 जून 2019

मौलिक और बेह्तरीन लेखन प्रिय कपिल५ जी। हार्दिक स्नेह भरी शुभ कामना

कपिल सिंह
03 जुलाई 2019

बहुत बहुत धन्यवाद मैम।

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28 जून 2019
मूक बधिर सत्य, स्थिर खड़ा एक कोने में, बड़े ध्यान से देख रहा है, सामने चल रही सभा को, झूठ, अपराध, भ्रष्टाचार इत्यादि, व्यस्त है अपने कर्मो के बखानो में, सब एक से बढ़ कर एक, आंकड़े दर्शा रहे है, सहसा दृष्टि गयी सामने सत्य की, सिर झुकाये सोफे पर बैठा, आत्मसम्मान, सब कुछ देख
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