दोहा

26 जून 2019   |  महातम मिश्रा   (23 बार पढ़ा जा चुका है)

कुछ दोहे


दिया हाथ में हाथ है, दिल भी इसके साथ।

करना दिल से जतन तुम, मेरे कोमल हाथ।।-1


दिल की गागर कोमली, रखना अपने पास।

छूट न जाये हाथ से, अति सुन्दर अहसास।।-2


कभी छोड़ जाना नहीं, मर्म मुलायम साथ।

मिलते हैं दिल खोलकर, मतलब के भी हाथ।।-3


कर जाती हैं आँख यह, हाथों के भी काम।

दिल की नगरी कब बसी, चाहत राहत आम।।-4


दो पहिये में जुत गए, कृष्ण और श्रीराम।

यही भारती रीति है, यही सुसत्य मुकाम।।-5


जन्म जगह अति कीमती, हैं रिश्ते अनमोल।

मन मिलने की बात है, चलो पथिक दिल खोल।।-6


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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