"मंगल गीत "

12 जुलाई 2019   |  सुखमंगल सिंह   (1698 बार पढ़ा जा चुका है)

"मंगल गीत  "

"मंगल गीत "

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जालिम सर चढ़ बोल रहा है, बंदूकों के साये में
वन्देमातरम में कब तक हम, कौम को जगायेंगे |
नरमुण्ड माला वाली माँ, कितना उसे दिखाएँगे
खून के प्यासे कातिल भरमाते आएंगे- भरमाएंगे ||

तीर -त्रिशूल पे कहाँ तक, विषधर का थूक लगाएंगे
जावाज़ खड़ा भारत मेरा कब हम जय हिंद गाएंगे |
माना युद्ध भूमि पर शहादत देने से स्वर्ग पाना है
वीर शहीदों के शान में वन्देमातरम गाये जाएंगे ||

केशरिया बाना वीरों के रणभेरी रण में बजायेंगे
शहीदों को गीत समर्पित हिन्द से लिखते आये |
देशपे मरने वालों को श्रद्धासुमन अर्पित करते आये
वन्देमातरम में कब तक हम कौम को जगायेंगे ||


हिन्दू- मुस्लिम सिक्ख- ईसाई माना भाई -भाई

त्राहि-त्राहि मची विश्व में हरहद पार बढ़ी कठिनाई

काली का आवाहन माँ'मंगळ मंगल होगा सुखदाई

दुश्मन को वन्देमातरम से दुःख हो तो हो दुखदाई ||


बढ़ता जुल्म देख नौकरशाही का प्रजा घबराई

हैं सन्नाटे में गूँज देख देख रही अब तो माई - ताई |

बड़ी - खड़ी - कढ़ी मूछें रखते आये हैं मेरे दादा- भाई

कौम को वन्देमातरम में कब तक हम जगायेंगे ||


फुलवा - सोनवा की थी टाठी में सबने जेवना खाई

मुछमुंडों के हाथों में जब से राष्ट्र की सत्ता आई |
उनने वन्देमातरम गीत पर निरंकुश अंकुश लगाईं
वन्देमातरम से दुश्मन को दुःख हो तो हो दुखदाई ||

वीर तुम बढे चलो धीर तुम बढे चलो सिंह दहाड़ लायें

अपनी जननी के गौरव की अविरल गाथा मिल गायें
संसद की दहलीज जगाने तिरंगा - मंगल गीत गवाई

वन्देमातरम गीत को गाने जच्चा बच्चा उमड़ते आई | |

-सुखमंगल सिंह ,वाराणसी ,मोबाइल ९४५२३०९६११

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बहुत ही सुन्दर रचना , देश के प्रति सम्मान प्रस्तुत किया आपने एक सुन्दर गीत के प्रति

हार्दिक अभिनंदन ,आभार प्रियंका शर्मा जी

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