तुमसे हे पिता

14 जुलाई 2019   |  प्राणेन्द्र नाथ मिश्रा   (132 बार पढ़ा जा चुका है)

तुमसे हे पिता

पिता पर लिखी अपनी एक बहुत पुरानी रचना याद आ गयी..कुछ अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ..


"तुमसे हे पिता !"


कितनी मन्नत कितनी पूजा,

कितनी कामना किया होगा,

पुत्रों का पथ हो निष्कंटक

पल पल आशीष दिया होगा...


मेरे लिए कभी तुमने

रूखी सूखी रोटी खायी ,

दरदर भटके मेरी खातिर

संचित की पाई-पाई ..


तुमने कितना कुछ दिया मुझे

मैं तुमको क्या दे पाऊँगा?

जन्मों जन्मों तक जनक मेरे !

मैं याचक बन कर आऊंगा...


मेरा रक्त ऋणी, मेरी श्वास ऋणी,

मैं ऋणी पिता! हर पल तुमसे,

मेरा अस्तित्व तुम्हीं से है

मैं सफल, तुम्हारे कर्मों से..


तुमसे यह जीवन मिला मुझे

तुमने विशाल संसार दिया,

तुसे सीखा पथ पर चलना

तुमने निश्छल व्यवहार दिया..


हे वृद्ध ! बहुत हो आगे तुम,

मैं तुमको क्या छू पाऊँगा?

तुमने जो छोडी चरण धूलि

माथे पे लगा, तर जाऊँगा...


हाय ! आज उन्हीं पुत्रों से जनक !

तुम्हे कष्ट मिला, है बलिहारी!

संवेदना दबाये, पत्थर से,

रहते हो मन कर के भारी ....


धिक्कार तुम्हारे पुत्रों को

धिक्कार सभी उनके विचार,

कर्तव्यहीन, विश्वास हीन

अभिशापित हों, ये बार बार ...


इससे तो अच्छा यह होता

अनपढ़ ही सारे रह जाते,

परिवार, वेदना, पिता , पुत्र

सेवा, सम्बन्ध समझ पाते...


ईश्वर सद्बुद्धि दे उनको

जो वृद्ध कभी तो होएंगे,

अपने बच्चों के बिछोह में

थोड़ा-थोड़ा सा रोयेंगे...


-- प्राणेन्द्र नाथ मिश्र

अगला लेख: कारगिल शहीद के माँ कीअंतर्वेदना



बहुत बहुत आदर के साथ धन्यवाद. .

रेणु
17 जुलाई 2019

वाह! आदरणीय सर -- ये रचना शब्दनगरी व्हाट्स अप्प समूह के लिंक जरिये उसी दिन पढ़ ली थी पर लिख ना पाई | सच कहूं तो ये अपनी तरह की आप रचना है जिसमें एक पुत्र का स्नेहिल पिता के प्रति बहुत ही अनुपम कृतज्ञ भाव समाहित हैं - जो हर बेटे के मन में होने चाहिए पर होते नहीं हैं | सचमुच कृतघ्न पुत्रों को ईश्वर जरुर सद्बुद्धि दे क्योंकि जब वे ऐसी ही ठोकर खायेंगे जब उन्हें पिता याद जरुर आयंगे वो भी जीवन की ना ढलने वाली साँझ में !!!!!! सादर |

बहुत अच्छा ह्रदय को छूने वाला

सादर धन्यवाद.

बहुत सुन्दर रचना. .. यथार्थ. ..

सादर आभार सहित धन्यवाद. .

anubhav
15 जुलाई 2019

बहुत सुंदर लेख लिखा है आपने

सादर धन्यवाद

शिक्षाप्रद लिखा है आपने सर, बहुत बधाइयाँ आपको. पुत्रों का पथ हो निष्कंटक....पल पल आशीष दिया होगा.. बहुत खूब

सादर धन्यवाद !

सादर धन्यवाद !

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