कजरी गीत

26 जुलाई 2019   |  महातम मिश्रा   (24 बार पढ़ा जा चुका है)

"कजरी गीत"


मोहन गोकुल नगर सुधारी, मधुवन कीन्ह सुखारी ना

जाकर मथुरा डगर निहारी, सुखी कीन्ह महतारी ना......मोहन गोकुल नगर....


धारी गोवर्धन गिरधारी, आओ न फिर यमुन कछारी ना

गाय ग्वाल गोपिन दुख हर्ता, पनघट की सखियाँ न्यारी..... मोहन गोकुल नगर ......


रास आस तुमसे बनवारी, गौतम तो रहा अनारी ना

सावन झूला डाल-डाल पर, है राधा विरह की मारी..... मोहन गोकुल नगर.....


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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