सीढियों पर किस्मत बैठी थी

28 जुलाई 2019   |  कपिल सिंह   (6183 बार पढ़ा जा चुका है)

सीढियों पर किस्मत बैठी थी

सीढियों पर किस्मत बैठी थी...
ना जाने किसकी प्रतीक्षा कर रहा थी...

उससे देख एक पल मैं खुश हुआ..
और पास जाकर पूछा..

क्या मेरी प्रतीक्षा कर रही हो...

उसने बिना कुछ बोले मुहँ फेर लिया..
दो तीन बार मैंने और प्रयास किया..
पर वो मुझसे कुछ ना बोली...

मैं समझ गया ये किसी और के लिए यहाँ बैठी है..
इस बार मैंने कोशिश की उससे रिझाने की..
अपना बनाने की...
उसने पलट कर देखा पर कुछ कहा नहीं..

एक विचित्र सी फ़िल्मी स्तिथि थी..
मैं उसे अपना बनाना चाहता था,

और वो किसी और की होना चाहती थी...

मैं भी वही बैठा रहा..
उससे अपना बनाने की युक्तिया सुझाते रहा..
कुछ क्षणों के लिए मेरी आँख लग गयी..
और किस्मत आँखों से ओझल हो गयी..

मुझे बहुत खेद हुआ और मैं मायूसी से उठा..
इतने में किसी ने बताया..
मुझे कोई पूछ रहा था..
अपना नाम कुछ "क" से बताया था..
उसने बहुत देर इंतज़ार प्रतीक्षा की मेरी ...
और चला गया..

और अब मैं विवश बैठा हूँ सीढियों पर..
अगले कदम की योजना बना रहा हूँ ...

अगला लेख: मेरा दोस्त



बहुत सुंदर

कपिल सिंह
29 जुलाई 2019

धन्यवाद मैम

कपिल सिंह
29 जुलाई 2019

धन्यवाद मैम,
और ये कविता बिलकुल भी नेगेटिव नहीं है, ओप्पोरच्युनिटीज़ आयी थी किन्तु मिल नहीं पायी, अंतिम पंक्तियों में स्पष्ट कर दिया कि ये ओप्पोरच्युनिटीज़ गयी किन्तु अब नए तरीके से शुरुआत करने की योजना बना रहा हूँ |

कपिल जी , आप इतना पॉजिटिव लिखने वाले , आज ये मु फेरने की कविता क्यों ! पर बहुत खूब लिखा

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
31 जुलाई 2019
अभी कल की ही बात है, मैं गाड़ी पार्क करके निकला ही था बाहर कि एक महिला तुरंत मेरे पास आयी और अंग्रेजी में कुछ फुसफुसाई। मैं सकपका गया, शुरू के 5 -7 क्षण तो मैं समझ ही नहीं पाया कि इन्हे समस्या क्या है। फिर पता चला कि वो यहाँ मुझसे पहले गाड़ी खड़ी करने वाली थी और मैंने उसकी जगह अपनी गाड़ी लगा दी। अंग्रेज
31 जुलाई 2019
01 अगस्त 2019
समय के प्याले में,जीवन परोसा जा रहा है,अतिथियों का जमघट लगा है,रौशनी झिलमिला रही है,अरे, बुरी किस्मत जी भी आयी है,लगता है, कुछ बिन बुलाये,अतिथि भी आये है,आये नहीं, जिनकी प्रतीक्षा है,स्वयं प्यालो को,विशेष अतिथि के रूप में,कई लोगो का निमंत्रण था,रात के दस बज चुके है,आया नहीं अभी कोई उनमे से,बाकि अतिथ
01 अगस्त 2019
19 जुलाई 2019
आज अनायस ही रसोईघर में रखे मसाले के डब्बे पर दृष्टी चली गयीजिसे देख मन में जीवन और मसालों के बीच तुलनात्मक विवेचना स्वतः ही आरम्भ हो गयी.... सर्वप्रथम हल्दी के पीत वर्ण रंग देख मन प्रफुल्लित हुआ जिस तरह एक चुटकी भर हल्दी अपने रंग में रंग देती है उसी समान अपने प्यार और सोहार्द्य से दुसरो को अपने रंग
19 जुलाई 2019
24 जुलाई 2019
मेरे प्यारे दोस्तों, या यूँ कहूं कि मेरे दसवीं , बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षा के अचयनित दोस्तों। ये लेख विर्निदिष्टतः आपके सब के लिए ही लिख रहा हूँ जो किसी परीक्षा में विफल हो जाने पर आत्महत्या जैसे बेतुके विचारो को अपने मष्तिष्क द्वारा आमंत्रित करते है। और क
24 जुलाई 2019
26 जुलाई 2019
रात के बाद फिर रात हुई... ना बादल गरजे न बरसात हुई.. बंजर भूमि फिर हताश हुई.. शिकायत करती हुई आसमान को.. संवेग के साथ फिर निराश हुई.. कितनी रात बीत गयी.. पर सुबह ना हुई.. कितनी आस टूट गयी.. पर सुबह ना हुई.. ना जला चूल्हा, ना रोटी बनी.. प्यास भी थक कर चुपचाप हुई.. निराशा के धरातल पर ही थी आशा.. की एक
26 जुलाई 2019
18 जुलाई 2019
ना मीठा खाने के पहले सोचा करते थेना मीठा खाने के बाद....वो बचपन भी क्या बचपन थाना डायबिटिक की चिंता ना कॉलेस्ट्रॉल था...दो समोसे के बाद भीएक प्याज़ की कचोरी खा लेते थे..अब आधे समोसे में भी तेल ज्यादा लगता है...मिठाई भी ऐसी लेते है जिसमे मीठा कम होऔर कम नमक वाली नमकीन ढूंढते रहते है...खूब दौड़ते भागते
18 जुलाई 2019
04 अगस्त 2019
जीवन के बाइस वर्षो तक मुझे खास दोस्त और दोस्ती का अर्थ भी नहीं पता था या फिर ऐसे कहूँ कि मुझे इनकी सिर्फ कागज़ी जानकारी थी और अपने आस पास घट रहे दोस्ती के उदाहरण देख लिया करता था। इतने वर्षो के बाद मेरा मिलान एक बेहद साधारण व्यक्तित्व के इंसान से तब हुआ जब मैं बहुत घबराया हुआ था। मेरे चाचाजी अस्पताल
04 अगस्त 2019
21 जुलाई 2019
मैं भी छूना चाहता हूँ उस नीले आकाश को.… जो मुझे ऊपर से देख रहा है, अपनी और आकर्षित कर रहा है, मानों मुझे चिढ़ा रहा हो, और मैं यहाँ खड़ा होकर… उसके हर रंग निहार रहा हूँ, ईर्ष्या भाव से नज़रें टिका कर, उसके सारे रंग देख रहा हूँ, अनेक द्वंद मेरे मन में..... कैसे पहुँचु मैं उसके पास एक बार, वो भी इठला कर,
21 जुलाई 2019
01 अगस्त 2019
समय के प्याले में,जीवन परोसा जा रहा है,अतिथियों का जमघट लगा है,रौशनी झिलमिला रही है,अरे, बुरी किस्मत जी भी आयी है,लगता है, कुछ बिन बुलाये,अतिथि भी आये है,आये नहीं, जिनकी प्रतीक्षा है,स्वयं प्यालो को,विशेष अतिथि के रूप में,कई लोगो का निमंत्रण था,रात के दस बज चुके है,आया नहीं अभी कोई उनमे से,बाकि अतिथ
01 अगस्त 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x