टाइम क्या हुआ है भाई

01 अगस्त 2019   |  कपिल सिंह   (431 बार पढ़ा जा चुका है)

टाइम क्या हुआ है भाई

समय के प्याले में,

जीवन परोसा जा रहा है,

अतिथियों का जमघट लगा है,

रौशनी झिलमिला रही है,

अरे, बुरी किस्मत जी भी आयी है,

लगता है, कुछ बिन बुलाये,

अतिथि भी आये है,

आये नहीं, जिनकी प्रतीक्षा है,

स्वयं प्यालो को,

विशेष अतिथि के रूप में,

कई लोगो का निमंत्रण था,

रात के दस बज चुके है,

आया नहीं अभी कोई उनमे से,

बाकि अतिथि आनंद ले रहे है,

जश्न का, एक और प्याले से,


ओह हो, लगता है, प्रवेश हुआ,

किसी विशेष अतिथि का,

चमचमाती कार से उतरती हुई,

झिलमिलाती साड़ी में "किस्मत" अंदर आयी,

और आते ही एक प्याले की ली,

सिर्फ एक चुस्की,

और चली गयी,

प्यालो का जश्न वही समाप्त हुआ,

और बाकी अतिथियो का जश्न,

अब भी चल रहा है,

इतने में एक प्याला चिल्लाया,

टाइम क्या हुआ है भाई।

अगला लेख: मेरा दोस्त



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 जुलाई 2019
सीढियों पर किस्मत बैठी थी...ना जाने किसकी प्रतीक्षा कर रहा थी...उससे देख एक पल मैं खुश हुआ..और पास जाकर पूछा..क्या मेरी प्रतीक्षा कर रही हो...उसने बिना कुछ बोले मुहँ फेर लिया..दो तीन बार मैंने और प्रयास किया..पर वो मुझसे कुछ ना बोली...मैं समझ गया ये किसी और के लिए यहाँ बैठी है..इस बार मैंने कोशिश क
28 जुलाई 2019
21 जुलाई 2019
मैं भी छूना चाहता हूँ उस नीले आकाश को.… जो मुझे ऊपर से देख रहा है, अपनी और आकर्षित कर रहा है, मानों मुझे चिढ़ा रहा हो, और मैं यहाँ खड़ा होकर… उसके हर रंग निहार रहा हूँ, ईर्ष्या भाव से नज़रें टिका कर, उसके सारे रंग देख रहा हूँ, अनेक द्वंद मेरे मन में..... कैसे पहुँचु मैं उसके पास एक बार, वो भी इठला कर,
21 जुलाई 2019
26 जुलाई 2019
रात के बाद फिर रात हुई... ना बादल गरजे न बरसात हुई.. बंजर भूमि फिर हताश हुई.. शिकायत करती हुई आसमान को.. संवेग के साथ फिर निराश हुई.. कितनी रात बीत गयी.. पर सुबह ना हुई.. कितनी आस टूट गयी.. पर सुबह ना हुई.. ना जला चूल्हा, ना रोटी बनी.. प्यास भी थक कर चुपचाप हुई.. निराशा के धरातल पर ही थी आशा.. की एक
26 जुलाई 2019
22 जुलाई 2019
मैं अतिउत्साहित गंतव्य से कुछ ही दूर था, वहां पहुचने की ख़ुशी और जीत की कल्पना में मग्न था, सहस्त्र योजनाए और अनगिनत इच्छाओ की एक लम्बी सूची का निर्माण कर चुका था, सीमित गति और असीमित आकांक्षाओं के साथ निरंतर चल रहा था, इतने में समय आया किन्तु उसने गलत समय बताया, बंद हो गया अचानक सब कुछ जो कुछ समय पह
22 जुलाई 2019
22 जुलाई 2019
मैं अतिउत्साहित गंतव्य से कुछ ही दूर था, वहां पहुचने की ख़ुशी और जीत की कल्पना में मग्न था, सहस्त्र योजनाए और अनगिनत इच्छाओ की एक लम्बी सूची का निर्माण कर चुका था, सीमित गति और असीमित आकांक्षाओं के साथ निरंतर चल रहा था, इतने में समय आया किन्तु उसने गलत समय बताया, बंद हो गया अचानक सब कुछ जो कुछ समय पह
22 जुलाई 2019
06 अगस्त 2019
बस कुछ ही दूर थी सफलता, दिखाई दे रही थी स्पष्ट, मेरा प्रिय मित्र मन, प्रफुल्लित था, तेज़ प्रकाश में, दृश्य मनोरम था, श्वास अपनी गति से चल रहा था, क्षणिक कुछ हलचल हुई, पैर डगमगाया, सामने अँधेरा छा गया, सँभलने की कोशिश की, किन्तु गिरने से ना रोक पाया अपने आप को, ना जाने कौन था, जो धकेल कर आगे चला गया,
06 अगस्त 2019
05 अगस्त 2019
अत्यंत दुर्बल परिस्तिथि में..एक साहसीय भीषण गर्जना,चारो ओर सन्नाटा..आपस में तांकते महा विभोर, दुःख.. कठिनाई.. तनाव.. समस्या..सब खड़े मौन,विस्मित मन से सोच रहे,अब हो गया इनका विरोध,कैसे करेंगे परेशान अब,सुन कर उसकी गर्जना,पीछे खड़ा.. सहमा हुआ डर..डर रहा था आगे आने को,सोच
05 अगस्त 2019
03 अगस्त 2019
सितारों, आज कहां छुपे हो?गुंफित से फिर नहीं दिखे होचमक दिखी न दिखा वो नूरकैसे भैया चकनाचूर?~~~~~नहीं दिखेंगे अब से तुमकोक्या मिलेगा हमसे सबकोतिमिर गया न गया वो अंधेरासूरज से ही होत सवेरा !~~~~~~करो न अपने दिल को छोटाछोटे से बढ बनते मोटासूरज भी इक तारा हैतुमसे नहीं वो न्यार
03 अगस्त 2019
26 जुलाई 2019
रात के बाद फिर रात हुई... ना बादल गरजे न बरसात हुई.. बंजर भूमि फिर हताश हुई.. शिकायत करती हुई आसमान को.. संवेग के साथ फिर निराश हुई.. कितनी रात बीत गयी.. पर सुबह ना हुई.. कितनी आस टूट गयी.. पर सुबह ना हुई.. ना जला चूल्हा, ना रोटी बनी.. प्यास भी थक कर चुपचाप हुई.. निराशा के धरातल पर ही थी आशा.. की एक
26 जुलाई 2019
05 अगस्त 2019
सुबह की ग़ज़ल --शाम के नाम आज़ाद होने के बाद से भारत के शहीदों की शहादत सबसे अधिक कश्मीर से जुड़े इलाकों में हुयी है. उन शहीदों की रूहें आज तक घूम घूम कर पूरे भारत के लोगों से गुहार कर रही हैं कि तिरंगे का केसरिया रंग कश्मीर के केसर से मिलाओ. शहीदों की यादें सब को छू कर गुज़रती हैं...बड़ी सुनसान राहें हैं
05 अगस्त 2019
04 अगस्त 2019
जीवन के बाइस वर्षो तक मुझे खास दोस्त और दोस्ती का अर्थ भी नहीं पता था या फिर ऐसे कहूँ कि मुझे इनकी सिर्फ कागज़ी जानकारी थी और अपने आस पास घट रहे दोस्ती के उदाहरण देख लिया करता था। इतने वर्षो के बाद मेरा मिलान एक बेहद साधारण व्यक्तित्व के इंसान से तब हुआ जब मैं बहुत घबराया हुआ था। मेरे चाचाजी अस्पताल
04 अगस्त 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x