आशा का घोड़ा ...

02 अगस्त 2019   |  दिगम्बर नासवा   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

आशा की आहट का घोड़ा
सरपट दौड़ रहा

सुखमय जीवन-हार मिला
साँसों में महका स्पंदन
मधुमय यौवन भार खिला
नयनों में सागर सनेह का
सपने जोड़ रहा

सरपट दौड़ रहा ...


खिली धूप मधुमास नया
खुले गगन में हल्की हल्की
वर्षा का आभास नया
मन अकुलाया हरी घास पर
झटपट पौड़ रहा
सरपट दौड़ रहा ...


सागर लहरों को बहना है
पृथ्वी को भी कर्म पथिक-सा
इसी तरह चलते रहना है
कौन चितेरा नवल सृष्टि से
राहें मोड़ रहा

सरपट दौड़ रहा ...

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रेणु
04 अगस्त 2019

आदरणीय दिगम्बर जी--- आपको अरसे बाद इस मंच पर पाकर अत्यंत प्रसन्नता हुई | आपकी रचना का क्या कहूं
खिली धूप मधुमास नया
खुले गगन में हल्की हल्की
वर्षा का आभास नया
मन अकुलाया हरी घास पर
झटपट पौड़ रहा
सरपट दौड़ रहा ..
आशा का दौड़ता हुआ ये घोड़ा बहुत ही अनुपम है | सादर शुभकामनायें | आपको अनाम पाठक खूब पढ़ रहे हैं इस मंच पर| सस्नेह सादर .

आपका अत्यंत आभार रेनू जी ... सारगर्भित टिप्पणियां, उन्मुक्त प्रशंसा का खज़ाना है आपके पास ... बहुत बहुत आभार है आपका ...

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