भीषण गर्जना

05 अगस्त 2019   |  कपिल सिंह   (508 बार पढ़ा जा चुका है)

भीषण गर्जना

अत्यंत दुर्बल परिस्तिथि में..
एक साहसीय भीषण गर्जना,
चारो ओर सन्नाटा..
आपस में तांकते महा विभोर,
दुःख.. कठिनाई.. तनाव.. समस्या..
सब खड़े मौन,

विस्मित मन से सोच रहे,
अब हो गया इनका विरोध,
कैसे करेंगे परेशान अब,
सुन कर उसकी गर्जना,
पीछे खड़ा.. सहमा हुआ डर..
डर रहा था आगे आने को,

सोच रहा था मन ही मन,
फिर किया आव्हान किसी ने,
अब पराजय निश्चित है,
गर्जना भर से ही सब विचलित है,
साथ में थोडा विस्मित है,

युक्तिया बना रहे है,
बचने की अब..
राह देख रहे है,
पलायन की अब..
जायेंगे वहा,
जहाँ ना सुनाई देगी,
इन्हें ललकारने की,
इतनी भीषण गर्जना...

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