खा जाओ इसको तल के

24 अगस्त 2019   |  अजय अमिताभ सुमन   (3540 बार पढ़ा जा चुका है)




शैतानियों के बल पे,दिखाओ बच्चों चल के,

ये देश जो हमारा, खा जाओ इसको तल के।


किताब की जो पाठे तुझको पढ़ाई जाती,

जीवन में सारी बातें कुछ काम हीं ना आती।


गिरोगे हर कदम तुम सीखोगे सच जो कहना,

मक्कारी सोना चांदी और झूठ हीं है गहना।


जो भी रहा है सीधा जीता है गल ही गल के,

चापलूस हीं चले हैं फैशन हैं आजकल के


इस राह जो चलोगे छा जाओगे तू फल के,

ये देश जो हमारा, खा जाओ इसको तल के।

अगला लेख: सागर के दर्शन जैसा



व्यंग्यात्मक कविता सटीक है ।

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