मंज़िल

25 अगस्त 2019   |  tejaswi यदलपति   (3501 बार पढ़ा जा चुका है)

ख्वाहिशों की मंज़िल

बहुत मुश्किल हैं

हिम्मत के रास्ते

से चलना हैं

रहे कुले हैं

बस आज़माने की देरी हैं

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