लिख दो कुछ शब्द --

29 अगस्त 2019   |  रेणु   (2450 बार पढ़ा जा चुका है)

 लिख दो कुछ शब्द --

लिख दो ! कुछ शब्द

नाम मेरे ,

अपने होकर ना यूँ -

बन बेगाने रहो तुम !

हो दूर भले - पास मेरे .

इनके ही बहाने रहो तुम !


कोरे कागज पर उतर कर .

ये अमर हो जायेंगे ;

जब भी छन्दो में ढलेंगे ,

गीत मधुर हो जायेंगे ;

ना भूलूँ जिन्हें उम्र भर

बन प्रीत के तराने रहो तुम !


जब तुम ना पास होंगे

इनसे ही बाते करूँगी .

इन्हीं में मिलूंगी तुमसे

जी भर मुलाकाते करूँगी

शब्दों संग भीतर बस

मेरे साथी रूहाने रहो तुम !


जीवन की

ढलती साँझ में

ये दुलारेंगे मुझे ,

तुम्हारे ही प्रतिरूप में-

स्नेहवश निहारेंगे मुझे ;

रीती पलकों पर मेरी

बन सपने सुहाने रहो तुम !


कौन जाने कब कहाँ

हो आखिरी पल इस मिलन का

शब्दों की अनुगूँज ही

होगी अवलंबन विकल मन का

पुकार सुनो

विचलित मन की

ना इस दर्द से अंजाने रहो तुम !!

स्वरचित --

मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

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कामिनी सिन्हा
23 सितम्बर 2019

हमेसा की तरह लाजबाब सृजन ,सखी

रेणु
25 सितम्बर 2019

सस्नेह आभार प्रिय कामिनी

नीरज चंदेल
11 सितम्बर 2019

बेहतरीन रचना.

नीरज चंदेल
11 सितम्बर 2019

बेहतरीन रचना.

नीरज चंदेल
11 सितम्बर 2019

बेहतरीन रचना.

रेणु
19 सितम्बर 2019

आपका हार्दिक आभार है नीरज जी |

अनिल शर्मा
10 सितम्बर 2019

आपकी सभी रचनाएँ बहुत अच्छी हैं.

रेणु
10 सितम्बर 2019

आपका हार्दिक स्वागत है अनिल जी

हृदय की गहराईयों से निकले हुए प्रेम से सराबोर सुंदर शब्दों का चयन करते हुए बहुत ही सुंदर काव्य रचना

रेणु
10 सितम्बर 2019

सादर सस्नेह आभार आचार्य जी

कुमार आशू
31 अगस्त 2019

बहुत सुंदर रचना 👌💐

रेणु
10 सितम्बर 2019

सस्नेह आभार आशु जी

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