बड़ा सुनसान अन्दर हो गया है...

31 अगस्त 2019   |  कुमार आशू   (424 बार पढ़ा जा चुका है)

बड़ा सुनसान अन्दर हो गया है...

जवाँ आँखों का मंज़र खो गया है

हर एक अहसास खंज़र हो गया है...


तमन्ना थी खिले बाग़-ए-चमन की

मग़र दिल एक बंज़र हो गया है...


तृप्ति की इक बूँद पाने की ललक में

समूचा मन समन्दर हो गया है...


न जाने कौन सा मोती लुटा है

बड़ा सुनसान अन्दर हो गया है....!


..............✍💔✍..…..........

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