मेरा स्वार्थ और उसका समर्पण

02 सितम्बर 2019   |  अर्चना वर्मा   (473 बार पढ़ा जा चुका है)

मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहीं

एक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहीं


चंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहीं

वो इस धरती का पहरेदार है, जिसे और कोई रिश्ता मालूम नहीं


उसके रग रग में बसा ये देश मेरा, और मेरा जीवन वो, ये उसे मालूम नहीं

है फ़र्ज़ अपना बखूबी याद उसे, पर धर्म अपना मालूम नहीं


उसका एक ही सपना है, इस मिट्टी पे न्यौछावर होने का

पर मेरे सपने कब टूटे ये उसे मालूम नहीं


उसने कहा न बॉधों मुझे इन रिश्तों में, मुझे कल का पता मालूम नहीं

मैं हँस कर उसको कहती हूँ,मेरा आज भी तुमसे और कल भी तुमसे इसके अलावा मुझे कुछ मालूम नहीं


वो कहता है तुम प्यार हो मेरा, पर जान मेरी ये धरती है

ये जन्म मिला इस धरती के लिये, ये वर्दी ही मेरी हसती है

कितनी शिकायतें कर लूँ उसकी,पर नाज़ मुझे है उस पे कितना ये किसे मालूम नहीं


फिर पछता के खुद से कहती हूँ , ये भी तो निस्वार्थ प्रेम है

जिसके आगे सब नत्मस्तक है , उसका समर्पण किसे मालूम नहीं




मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहीं
एक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहीं

चंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहीं
वो इस धरती का पहरेदार है, जिसे और कोई रिश्ता मालूम नहीं

उसके रग रग में बसा ये देश मेरा, और मेरा जीवन वो, ये उसे मालूम नहीं
है फ़र्ज़ अपना बखूबी याद उसे, पर धर्म अपना मालूम नहीं

उसका एक ही सपना है, इस मिट्टी पे न्यौछावर होने का
पर मेरे सपने कब टूटे ये उसे मालूम नहीं

उसने कहा न बॉधों मुझे इन रिश्तों में, मुझे कल का पता मालूम नहीं
मैं हँस कर उसको कहती हूँ,मेरा आज भी तुमसे और कल भी तुमसे इसके अलावा मुझे कुछ मालूम नहीं

वो कहता है तुम प्यार हो मेरा, पर जान मेरी ये धरती है
ये जन्म मिला इस धरती के लिये, ये वर्दी ही मेरी हसती है
कितनी शिकायतें कर लूँ उसकी,पर नाज़ मुझे है उस पे कितना ये किसे मालूम नहीं

फिर पछता के खुद से कहती हूँ , ये भी तो निस्वार्थ प्रेम है
जिसके आगे सब नत्मस्तक है , उसका समर्पण किसे मालूम नहीं







Archana Ki Rachna: Preview "मेरा स्वार्थ और उसका समर्पण "

अगला लेख: प्रकृति मानव की



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 अगस्त 2019
मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम
27 अगस्त 2019
13 सितम्बर 2019
आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसेमहिलाओं के माथे से बिंदी जैसेकभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोगअब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसेलगा है चसका जब से लोगों अंगरेजियत अपनाने काअपने संस्कारों को दे दी हो तिलांजलि जैसेअब तो हाय बाय के पीछे हिंदी मुँह छिपाती हैमात्र भाषा हो
13 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
थो
कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व
09 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
थो
कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व
09 सितम्बर 2019
08 सितम्बर 2019
सि
जब तुम आँखों से आस बन के बहते होउस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैंलड़खड़ाती गिरती और संभलती हुईसिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैंलोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सीऔर भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैंवो दूरियां
08 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब
11 सितम्बर 2019
27 अगस्त 2019
मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम
27 अगस्त 2019
26 अगस्त 2019
ज़ि
ज़िन्दगी मिली जुली धूप छाँव में घुली कभी नमक ज़्यादा तो चीनी कमपर शाही टुकड़े सी लगी दुख ने सुख को पहचाना इन दोनो का मेल पुराना क्या राजा क्या रंक केजिसकी झोली में ये जोड़ी ना मिलीज़िन्दगी मिली जुली धूप
26 अगस्त 2019
27 अगस्त 2019
मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम
27 अगस्त 2019
09 सितम्बर 2019
थो
कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व
09 सितम्बर 2019
12 सितम्बर 2019
हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझेहर बार उसी शिद्दत से हर बार टूटा और सम्भ्ला उतनी ही दिक्कत से हर बार नया पन लिये आया सावन हर बार उमंगें नयी, उमीदें नयी पर मेरा समर्पण वहीं हर बार वही शिद्दत हर बार वही दिक्कत हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझेहर बार सकारात्मक
12 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
तु
जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेबस इतना सुकून हैजैसा तुमने कियावैसा नहीं किया मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेहाँ खुद से प्यार करती थीमैं ज़रूरपर जितना तुमसे कियाउस से ज़्यादा नहींतुम्हारी हर उलझनों कोअपना लिया था मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेतुम्हारी लाचारियाँ मज़बूरियाँसब स्वीकार थी मुझकोसिर्फ उस रिश्ते
16 सितम्बर 2019
09 सितम्बर 2019
थो
कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व
09 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
मे
मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँके शब्दों में छुपे एहसास कोकागज़ पे उतार पाऊँऔर मरने के बाद भी अपनीकविता से पहचाना जाऊँमुझे शौक नहीं मशहूर होने काबस इतनी कोशिश है केवो लिखूं जो अपने चाहने वालोंको बेख़ौफ़ सुना पाऊँये सच है के मेरे हालातोंने मुझे कविता करना सीखा दियारहा तन्हा
17 सितम्बर 2019
08 सितम्बर 2019
सि
जब तुम आँखों से आस बन के बहते होउस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैंलड़खड़ाती गिरती और संभलती हुईसिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैंलोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सीऔर भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैंवो दूरियां
08 सितम्बर 2019
29 अगस्त 2019
चंद अधूरीख्वाहिशें और बिखरे ख्वाब लिए उड़ चला है दिल कही दूरकुछ नयी हसरतें और फर्माइशें पूरी कर लेने को थोड़ा और जी लेने को यूं तोमायूस रहा अब तक चाहतों के बोझ तले पर अब न होगा येफिर कभी ये सोच उड़
29 अगस्त 2019
11 सितम्बर 2019
कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब
11 सितम्बर 2019
10 सितम्बर 2019
ना
नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहींमेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में बैठे दिग्गजों को
10 सितम्बर 2019
27 अगस्त 2019
मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम
27 अगस्त 2019
10 सितम्बर 2019
ना
नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहींमेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में बैठे दिग्गजों को
10 सितम्बर 2019
25 अगस्त 2019
"
मैं बेटी हूँ नसीबवालो के घर जनम पाती हूँ कहीं "लाडली" तो कहीं उदासी का सबब बन जाती हूँ नाज़ुक से कंधोपे होता है बोझ बचपन सेकहीं मर्यादा और समाज के चलते अपनी दहलीज़ में सिमट के रह जाती हूँ और कहीं
25 अगस्त 2019
09 सितम्बर 2019
थो
कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व
09 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब
11 सितम्बर 2019
11 सितम्बर 2019
कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब
11 सितम्बर 2019
08 सितम्बर 2019
सि
जब तुम आँखों से आस बन के बहते होउस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैंलड़खड़ाती गिरती और संभलती हुईसिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैंलोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सीऔर भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैंवो दूरियां
08 सितम्बर 2019
27 अगस्त 2019
मेरी छाँव मे जो भी पथिक आयाथोडी देर ठहरा और सुस्तायामेरा मन पुलकित हुआ हर्षायामैं उसकी आवभगत में झूम झूम
27 अगस्त 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x