कैसे समझाऊ?

03 सितम्बर 2019   |  जानू नागर   (2713 बार पढ़ा जा चुका है)

कैसे समझाऊ?

कैसे समझाऊ?


देश विकास कर रहा है, सोना आसमान छू रहा।

किसी का आँख मुँह तिरछा ,यह सेल्फी कह रहा।


पानी जमीन का घटा, पानी चाँद की गोद मे दिख रहा।

मानव कर प्रकृति को बर्बाद, रहने चाँद में जा रहा।


दिल्ली का जाम झेला नही जाता, हैलीकॉप्टर की बात सुना रहा।

कर आयुष्मान भारत का निर्माण, मना आँख के ऑपरेशन को कर रहा।


कर बैंकों का विलय, चकमा जनता को दे रहा।

चुरा नज़र देश की जनता से, यात्रा विदेश की कर रहा।


इंसान, इंसान के खून का प्यासा हो कर, बदनाम जानवर को कर रहा।

अबके इंसान और पहले के राक्षसों में कोई फर्क नही, यह दौर भी रो-रो के सबसे कह रहा।


छोड़ दो पैसे के लालच को, यह बेटा बेटी कह रहा।

घर का बुजुर्ग बन नरकंकाल अपनी कोठी में, बेटा विदेश में कमा रहा।

अगला लेख: कैसे समझाऊ?



anubhav
04 सितम्बर 2019

ये बात गहराई से सोचने की जरूरत है कि क्या सच में मेरा देश बदल रहा है ??

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x