ख़ामोश होने से पहले

12 सितम्बर 2019   |  Shashi Gupta   (8020 बार पढ़ा जा चुका है)

ख़ामोश होने से पहले

ख़ामोश होने से पहले

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ख़ामोश होने से पहले हमने


देखा है दोस्त, टूटते अरमानों


और दिलों को, सर्द निगाहों को


सिसकियों भरे कंपकपाते लबों को


और फिर उस आखिरी पुकार को


रहम के लिये गिड़गिड़ाते जुबां को


बदले में मिले उस तिरस्कार को


अपनो से दूर एकान्तवास को


गिरते स्वास्थ्य ,भूख और प्यास को


सहा है मैंने , मित्रता के आघात को


पाप-पुण्य के तराजू पे,तौलता खुद को


मौन रह कर भी पुकारा था , तुमको


सिर्फ अपनी निर्दोषता बताने के लिये


सोचा था जन्मदिन पर तुम करोगे याद


ढेरों शुभकामनाओं के मध्य टूटी ये आस

ख़ामोशी बनी मीत,जब कोई न था साथ


दर्द अकेले सहा ,नहीं था कोई आसपास


चलो अच्छा हुआ तुम भी न समझे मुझको


अंधेरे से दोस्ती की ,दीपक जलाऊँ क्यों !!


- व्याकुल पथिक

जीवन की पाठशाला

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रेणु
13 सितम्बर 2019

विकल मन के भावों का मार्मिक शब्दांकन शशि भाई |लिखते रहिये | ये आपकी रचनात्मकता को | बढ़ा रहा है

Shashi Gupta
13 सितम्बर 2019

जी दी प्रणाम

Shashi Gupta
13 सितम्बर 2019

धन्यवाद

हिना
13 सितम्बर 2019

बहुत खूब

Shashi Gupta
13 सितम्बर 2019

जी धन्यवाद

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