सुबह शाम

16 सितम्बर 2019   |  मंजू गीत   (6474 बार पढ़ा जा चुका है)

वो मुझे सुबह भेजती, मैं उसे शाम भेजता। वो सुबह सी ताजगी देती, मैं शाम का सुकुन देता। वो सुबह की चहक बन जाती, मैं शाम का साज बनता। वो सुबह के फूलों सी, बन तितली, मेरे मन भाती, मैं शाम का झिगूंर, बन जुगनू , उसकी आस को रोशन करता। वो सुबह की लाली, मैं शाम का गोधूलि बेला। वो सुबह प्रीत मेरी, मैं शाम मीत उसका...

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जानू नागर
19 सितम्बर 2019

प्रकृति को बहुत अच्छे से लिखा हैं|

मंजू गीत
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आपका

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