"जय हो"

17 सितम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (6051 बार पढ़ा जा चुका है)

"जय हो"

जय हो- अमर सृजन हो

दग्ध मानवता- रक्षित हो

अष्टपाश- सट् ऋपु मुर्छित हों

''नवचक्र'' आह्वाहन जागृत हों

कीर्तित्व उजागर - बर्धित हों

शंखनाद् प्रचण्ड, कुण्डल शोभित हों

कवि का हृदयांचल अजर - अमर हो

जय हो! 'वीणा वादनी' की जय हो!!

🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏


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