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13 सितम्बर 2019
लड़की हैं वोह कोई खिलौना नहीं जज़्बात हैं उसकी भी कोई मज़ाक नहीं जताने के लिए वोह कोई हक़ नहीं इंसान हैं वह कोई अमानत नहीं
13 सितम्बर 2019
28 सितम्बर 2019
👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️शरहद की ओर तकने वालों केसंग 'खून की होली' वीर खेलते।शरहद की ओर तकते वालों केसंग खून की होली बाँकुणे खेलते।।कौन धृष्ट कहता "एल. ओ. सी."की तरफ न भारतीयों तुम देखो!शरहद पार कर हमने खदेड़ापुलवामा को जा जरा देखो!!'सोने की चिड़िया' को अरेबहुतो ने सदियों था नोचा।संभल गये अब हम- ब
28 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
जय हो- अमर सृजन होदग्ध मानवता- रक्षित होअष्टपाश- सट् ऋपु मुर्छित हों''नवचक्र'' आह्वाहन जागृत होंकीर्तित्व उजागर - बर्धित होंशंखनाद् प्रचण्ड, कुण्डल शोभित होंकवि का हृदयांचल अजर - अमर होजय हो! 'वीणा वादनी' की जय हो!! 🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
17 सितम्बर 2019
04 अक्तूबर 2019
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺*"काव्य सरिता" घर-घर बहती है!**कवि-मन को व्यथित करती है!!**अन्न-जल त्याग "देवी जी" बैठी है!**"दुर्गा" का मानो 'अवतार' हुआ है!!**'क्षत-विक्षत' सारा 'घर-बार' हुआ है!**ठप्प कलह-द्वद्व से व्यापार हुआ है!!**"पाठ-मंचन" से नहीं त्राण मिलना है!**ऋणम् लेवेत-धृतम् पिवेत वरना है!!**कलश स्
04 अक्तूबर 2019
01 अक्तूबर 2019
'कलाकृतिश्रष्टाओं' को नमन् है।''प्रतिमा'' का 'विसर्जन गलत है।।सगुण साधना का प्रथम चरण है।ईश्वरत्व हेतु "अंत: यात्रा" तंत्र है।।🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
01 अक्तूबर 2019
10 सितम्बर 2019
मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं
10 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
जय हो- अमर सृजन होदग्ध मानवता- रक्षित होअष्टपाश- सट् ऋपु मुर्छित हों''नवचक्र'' आह्वाहन जागृत होंकीर्तित्व उजागर - बर्धित होंशंखनाद् प्रचण्ड, कुण्डल शोभित होंकवि का हृदयांचल अजर - अमर होजय हो! 'वीणा वादनी' की जय हो!! 🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
17 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
22 सितम्बर 2019
अँ
DOGMA NO MORE MOREपरंपरा अंधविश्वास का पुष्ट कारण भी हो सकता है।मेरे पुर्वजों ने चुंकि ऐसा किया,अतयेव मुझे भी करना चाहिए---गलत है।उस समय की अवस्था क्या 【?】 थी,यह उनके सामयिक सिस्टम के अनुकूलऐसा कुछ हो रहा होगा, परन्तु आज वहगलत भी हो सकता है, गलत है सरासर- समय के प्रतिकूल।"सती प्रथा" कभी धर्मिक मान्य
22 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
"हमारा संबंध", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :https://hindi.pratilipi.com/story/srpcyca7uvmf?utm_source=android&utm_campaign=content_shareभारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!
17 सितम्बर 2019
23 सितम्बर 2019
कल मिलुँगा मैं तुझे,किस हाल में (?)कोई कहीं लिखा पढ़-कह नहीं सकता।नसीब के संग जुटा हूँ-ओ' मेरे अहबाब,अहल-ए-तदबीर में मगर,कोताही कर नहीं सकता।।के. के.
23 सितम्बर 2019
01 अक्तूबर 2019
'कलाकृतिश्रष्टाओं' को नमन् है।''प्रतिमा'' का 'विसर्जन गलत है।।सगुण साधना का प्रथम चरण है।ईश्वरत्व हेतु "अंत: यात्रा" तंत्र है।।🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
01 अक्तूबर 2019
18 सितम्बर 2019
जीवन की रामकहानी कितने ही दिन मास वर्ष युग कल्प थक गए कहते कहते पर जीवन की रामकहानी कहते कहते अभी शेष है || हर क्षण देखो घटता जाता साँसों का यह कोष मनुज का और उधर बढ़ता जाता है वह देखो व्यापार मरण का ||सागर सरिता सूखे जाते, चाँद सितारे टूटे जाते पर पथराई आँखों में कुछ बहता पानी अभी शेष है ||एक ईं
18 सितम्बर 2019
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