Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

26 सितम्बर 2019   |  अर्चना वर्मा   (429 बार पढ़ा जा चुका है)

ऐसा क्या है जो तुम मुझसे

कहने में डरते हो

पर मेरे पीछे मेरी बातें करते हो

मैं जो कह दूँ कुछ तुमसे

तुम उसमें तीन से पांच

गढ़ते हो

और उसे चटकारे ले कर

दूसरों से साँझा करते हो

मैं तो हूँ खुली किताब
बेहद हिम्मती और बेबाक़
रोज़ आईने में नज़र
मिलाता हूँ अपने भीतर झाँक, फिर
ऐसा क्या है जो तुम मुझसे
स्वयं पूछने में डरते हो ?

एक लम्बा सफर तय किया है मैंने
जहाँ भी आज मैं पहुंचा हूँ
गिरा संभाला पर अपना
स्वाभिमान बनाये रखा हूँ
मेरे जूते पहन के ही तुम
उसके काटने की चुभन समझ
सकते हो

वो जीवन ही क्या जिसमें
सुनाने को कोई कहानी न हो
जिनमें गलतियों से सीखने का
कोई सबक न हो
पर वो कहानी मैं तुम्हें सुनाऊँ
क्या इतनी समझदारी तुम रखते हो ?

मेरे जीवन में कई उलझनें हैं
जो शायद सुलझाने से भी
न सुलझेगी
पर उनके बारे में न सोचते हुए
तुम अपने काम से काम
क्यों नहीं रखते हो ?

डंके की चोट पे करता
हूँ हर काम
किशोर दा का गाना
बहुत आता है मेरे काम
" कुछ तोह लोग कहेंगे
लोगों का काम है कहना "
यही गाना सुनते हुए अब
इस लेखनी को देता हूँ विश्राम

मुझे क्या तुम सोचते रहो
और मेरी बातें करते रहो
क्योंकि "बदनाम" होने में भी
है बहुत नाम

Archana Ki Rachna: Preview " मैं बदनाम "

https://4800366898232342829_ff99ab5473125dccb5469d264493d7da532192d6.blogspot.com/b/post-preview?token=APq4FmDI5sGbOzKYeRnyaQsKzUQON9qt8SUDeLPUEGdA-My6VqSStg0-BJm1dFEIR_MqUNYqfj6jstus6vt7LpKhTEvRHaZztVNEmnWKj3bu-iXBuih4fYjDRU-2cxsO7D6Zw7bVvXSM&postId=6675816825471522481&type=POST

अगला लेख: Archana Ki Rachna: Preview "इस बार की नवरात्री "



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
17 सितम्बर 2019
हि
"गीत"हिंदी हिंद की जान है, आन बान और शान हैभारत के हर वासी का, युग-युग से पहचान हैहर बोली में लहजा हिंदी, हर माथे पर सोहे बिंदीघर-घर में इंसान है, आँगन मुख मुस्कान है.......लिखना रुचिकर पढ़ना रुचिकर, रुचिकर है आठो डाँड़ीहिंदी के हर शब्द में बहती, गंगा यमुना की नाड़ीस्वर व्यंजन की आरती, प्रिय प्रतीक माँ
17 सितम्बर 2019
20 सितम्बर 2019
A
इस बार घट स्थापना वो ही करेजिसने कोई बेटी रुलायी न होवरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश के दिखावे में जब तुम बेटी की हत्या करते हो अपने गंदे हाथों से तुम ,उसकी चुनर खींच लेते होइस बार माँ पर चुनर तब
20 सितम्बर 2019
23 सितम्बर 2019
A
हाँ मैं तुम जैसा नहींतो क्या हुआ ?मुझमे भी जीवन हैमुझे क्यों आहत करते हो ?? हमें संज्ञा दे कर पशुओं कीखुद पशुओं से कृत्य करते होकल जब तुम ले जा रहे थेमेरी माँ कोमैं फूट फूट कर रोया थामैं छोटा सा एक बच्चा थामैंने अपनी माँ को खोया थामैं लाचार
23 सितम्बर 2019
14 सितम्बर 2019
हिंदी है हम वतन है। अपनी अभिव्यक्ति कहने का जतन है, अपनी संस्कृति का न हो पतन, बस यही जतन है। हिंदी है हम वतन है। जुबानें बेहिसाब है जहां में, हम वतन के, खुद के आजाद ख्यालात की, जुबान है हिंदी... अपनेपन का अहसास, खुद के शब्दों की परवाज़ है हिंदी, कोयल की जुबान है हिंदी। हिंदी है हम वतन है...
14 सितम्बर 2019
18 सितम्बर 2019
जीवन की रामकहानी कितने ही दिन मास वर्ष युग कल्प थक गए कहते कहते पर जीवन की रामकहानी कहते कहते अभी शेष है || हर क्षण देखो घटता जाता साँसों का यह कोष मनुज का और उधर बढ़ता जाता है वह देखो व्यापार मरण का ||सागर सरिता सूखे जाते, चाँद सितारे टूटे जाते पर पथराई आँखों में कुछ बहता पानी अभी शेष है ||एक ईं
18 सितम्बर 2019
13 सितम्बर 2019
आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसेमहिलाओं के माथे से बिंदी जैसेकभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोगअब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसेलगा है चसका जब से लोगों अंगरेजियत अपनाने काअपने संस्कारों को दे दी हो तिलांजलि जैसेअब तो हाय बाय के पीछे हिंदी मुँह छिपाती हैमात्र भाषा हो
13 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
ईरानी (पर्शियन )समाज में हिंदी भाषा का महत्व डॉशोभा भारद्वाज मुझेकई वर्ष तक परिवार सहित ईरान में रहने का अनुभव रहा है | ईरान के शाह मोहम्मद रजापहलवी ,पहलवी राजवंश के आखिरी शाह थे उन्होंने शान शौकत के साथ आर्य मिहिर की उपाधिधारण की उनके खिलाफ क्रान्ति का ऐसा म
16 सितम्बर 2019
06 अक्तूबर 2019
मौ
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
06 अक्तूबर 2019
17 सितम्बर 2019
मे
मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँके शब्दों में छुपे एहसास कोकागज़ पे उतार पाऊँऔर मरने के बाद भी अपनीकविता से पहचाना जाऊँमुझे शौक नहीं मशहूर होने काबस इतनी कोशिश है केवो लिखूं जो अपने चाहने वालोंको बेख़ौफ़ सुना पाऊँये सच है के मेरे हालातोंने मुझे कविता करना सीखा दियारहा तन्हा
17 सितम्बर 2019
14 सितम्बर 2019
आओ दिखाऊं तुम्हें अपनी चमचमाती कारजिस के लिए ले रखा है मैंने उधार दिखावे और प्रतिस्पर्धा में घिर चूका हूँ ऐसे समझ में नहीं आता कब कहा और कैसे किसी के पास कुछ देख के लेने की ज़िद्द करता हूँ एक बच्चे के जैसे और फिर पूरा करता हूँ उधार के पैसे कटवा के अपना वेतन हर बार आओ
14 सितम्बर 2019
16 सितम्बर 2019
पितृपक्ष चल रहा है | सभी हिन्दू धर्मावलम्बी अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धासुमन समर्पित कर रहे हैं | हमने भी प्रतिपदा को माँ का श्राद्ध किया और अब दशमी कोपिताजी का करेंगे | कुछ पंक्तियाँ इस अवसर पर अनायास ही प्रस्फुटित हो गईं... सुधीपाठकों के लिए समर्पित हैं...भरी भीड़ में मन बेचारा खड़ा हुआ कुछ
16 सितम्बर 2019
19 सितम्बर 2019
A
जब भी तुम्हें लगे की तुम्हारी परेशानियों का कोई अंत नहींमेरा जीवन भी क्या जीना है जिसमे किसी का संग नहींतो आओ सुनाऊँ तुमको एक छोटी सी घटनाजो नहीं है मेरी कल्पनाउसे सुन तुम अपने जीवन पर कर लेना पुनर्विचारएक दिन मैं मायूस सी चली जा रही थीखाली सड़को पर अपनी नाकामयाबियों क
19 सितम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x