गुलाब

27 सितम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (449 बार पढ़ा जा चुका है)

गुलाब

🥀🥀🥀🥀गुलाब🥀🥀🥀🥀🥀
🥀🥀तेरी हीं अद्भुत रचना मैं हूँ🥀🥀
🥀खुशबू फैला कर मुरझा जाता हूँ🥀
🥀सिंचित करता वनमाली पर,🥀
🥀अनजाने में चुभ पीड़ा पहुँचाता हूँ🥀
🥀चाहा मगर, काँटों को छुपा नहीं पाता हूँ🥀
🥀🥀🥀डॉ. कवि कुमार निर्मल 🥀🥀🥀


अगला लेख: विश्व शांति दिवस पर



शोभा भारद्वाज
28 सितम्बर 2019

अति सुंदर भाव

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 अक्तूबर 2019
भगुआ वस्त्र धारण कर साधु नहीं बन कोई सकता। जीव को प्रिय है प्राण, हंता नहीं साधु बन सकताअहिंसा का पाठ तामसिक वस्त्रधारी पढ़ा नहीं सकता।सात्विक बन कर हीं कोई सच्चा साधु बन भगुआ धारण कर सकता।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
05 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
स्
संपादन का विकल्प नहीं मिल रहा, हठात लिखी रचना वा डाली छवि में संशोधनार्थ?
09 अक्तूबर 2019
15 सितम्बर 2019
"
*गुम हो गए संयुक्त परिवार**एक वो दौर था* जब पति, *अपनी भाभी को आवाज़ लगाकर* घर आने की खबर अपनी पत्नी को देता था । पत्नी की छनकती पायल और खनकते कंगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे । बाऊजी की बातों का.. *”हाँ बाऊजी"* *"जी बाऊजी"*' के अलावा दूसरा जवाब नही होता था ।*आज बेटा बाप से बड़ा हो गया
15 सितम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
19 सितम्बर 2019
खि
03 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
23 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
09 अक्तूबर 2019
01 अक्तूबर 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x