आर्यावर्त

28 सितम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (434 बार पढ़ा जा चुका है)

👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️

शरहद की ओर तकने वालों के

संग 'खून की होली' वीर खेलते।

शरहद की ओर तकते वालों के

संग खून की होली बाँकुणे खेलते।।


कौन धृष्ट कहता "एल. ओ. सी."

की तरफ न भारतीयों तुम देखो!

शरहद पार कर हमने खदेड़ा

पुलवामा को जा जरा देखो!!


'सोने की चिड़िया' को अरे

बहुतो ने सदियों था नोचा।

संभल गये अब हम- बहुत,

इस पार आने की न सोंचो।।


पसीना बहा बहुत हमने

अपने वतन को सींचा है।

सूखी रोटी मिलती दो जून,

न कहना स्वाद फिका हैं।।


बुलंद हमारा भारत है अब

फिर आर्यावर्त बन सँवरेगा।

हर घर में लक्ष्मी कुबेर को

आह्लादित उदार देखेगा।।


ऋषियों को सत् - सत् नमन् हमारा

आज भी 'पितृ यज्ञ' है हमने किया।

आशिर्वाद है संग उन "पुरखों" का

भरपूर हमने झोऐ भर भर लिया।।


रणबांकुणे हमारे युद्धभूमि में

मर कर भी अमरत्व हैं पाते।

शरहद की ओर तकने वालों के

संग 'खून की होली' वीर खेलते।।


डॉ. कवि कुमार निर्मल ©®

🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️

अगला लेख: विश्व शांति दिवस पर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 अक्तूबर 2019
'कलाकृतिश्रष्टाओं' को नमन् है।''प्रतिमा'' का 'विसर्जन गलत है।।सगुण साधना का प्रथम चरण है।ईश्वरत्व हेतु "अंत: यात्रा" तंत्र है।।🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
01 अक्तूबर 2019
07 अक्तूबर 2019
श्
💥श्रीमद्भगवद्गीता💥 """""""""""""""""""" * अध्याय 2 * """"""""""""""""""संजय बोल -------- --------------दयायुक्त अश्रुओं से पूर्ण,नयन में भर अर्जुन हैं खड़े ।बताने को बातें सम्पूर्ण, श्री भगवन अब तो बोल पड़े ।।1।। 💥ऐसे पल म
07 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
रात अभी बहुत कुछ बाकी हैरात होने को आई आधी हैलिखना बाकी अभी प्रभाती हैनक्षत्र "विशाखा" ऋतु- ''शरद" शुभकारी हैकल 'पंचमी', नक्षत्र अनुराधा, कन्या साथी हैस्वर्ण आभुषण प्रिये को देता पर प्लाटिनम-कार्ड खाली हैकवि उदास, कह लेता हूँ मृदु 'दो शब्द', कहना काफी हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
03 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
स्
संपादन का विकल्प नहीं मिल रहा, हठात लिखी रचना वा डाली छवि में संशोधनार्थ?
09 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★
06 अक्तूबर 2019
17 सितम्बर 2019
जय हो- अमर सृजन होदग्ध मानवता- रक्षित होअष्टपाश- सट् ऋपु मुर्छित हों''नवचक्र'' आह्वाहन जागृत होंकीर्तित्व उजागर - बर्धित होंशंखनाद् प्रचण्ड, कुण्डल शोभित होंकवि का हृदयांचल अजर - अमर होजय हो! 'वीणा वादनी' की जय हो!! 🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
17 सितम्बर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
खि
03 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
30 सितम्बर 2019
23 सितम्बर 2019
05 अक्तूबर 2019
19 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x