आधी रात के नावें एक सृजन (रचना काल: 3.10.'19)

03 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (476 बार पढ़ा जा चुका है)

रात अभी बहुत कुछ बाकी है

रात होने को आई आधी है

लिखना बाकी अभी प्रभाती है

नक्षत्र "विशाखा" ऋतु- ''शरद" शुभकारी है

कल 'पंचमी', नक्षत्र अनुराधा, कन्या साथी है

स्वर्ण आभुषण प्रिये को देता पर प्लाटिनम-कार्ड खाली है

कवि उदास, कह लेता हूँ मृदु 'दो शब्द', कहना काफी है


डॉ. कवि कुमार निर्मल

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