जान अभी बाकी हैं

03 अक्तूबर 2019   |  जानू नागर   (438 बार पढ़ा जा चुका है)

जान अभी बाकी हैं |

हरि को नहीं देखा इंसान बनाते हुए|

इंसान को देख हैं हरि को बनाते हुए |

अमीरों की लकड़ियाँ उनकी अस्थिमंजर हैं|

उनकी अस्थिमंजर गरीबो की छत्र छाया हैं |

गौर से देखा उनको चौक-चौराहो मे बैठे हुए|

सवार ट्रक मे ढ़ोल लंगाड़ो मे रंग गुलाल उड़ाते हुए|

जल समाधि की वजह से उनकी काया बदल गई|

बची अस्थिमंजर से बस्तियाँ बन गई नदी के किनारे|

इसी वजह से इन्हे हरिजन बस्तियाँ कहते हैं लोग |

कभी फरमान जारी होते हैं कोर्ट और सुप्रीमकोर्ट से|

उनकी अस्थिमंजरों को रौंदता हुआ बुलडोजर गया|

देख टूटी हरि की अस्थिमंजरों को हरिजन चिल्लाया|

रहमखाओ हरि के ऊपर जिसने इंसानी काया बनाया |

सच आज भी गुमनाम हैं कहानियो और इतिहासों से |

हरि को नहीं देखा इंसान बनाते हुए|

इंसान को देख हैं हरि को बनाते हुए |

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