नारी

03 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (8021 बार पढ़ा जा चुका है)

नारी

नर नारायण बन स्वामि बन अगराता है।

नारी कामायनी बन, अश्रु धार बहाती है।।

🏵️ 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ 🏵️

भ्रुण काल माना विस्मृत कर क्षमा - पात्र है।

शिशु स्तन पान कर नवजीवन हीं पाता है।।

तरुण गोद से उछल - कूद दौड़ लगाता है।

युवा नार सौंदर्य में अपने स्वप्न सजाता है।।

वयस्क - वृद्ध लाठी कह सटे से रह जाते हैं।

अंत काल देख बिलख - रोते पर मर जाते हैं।।

नारी की लोरी जीवन की अमृत धुली जिह्वा है।

नारी लक्ष्मी - सरस्वती - दुर्गा स्वरुप - माता है।।

कर्ज से पुरुष "उऋण" नहीं कभी हो पाया है।

देवी माँ की सेवा कर हीं मेवा प्रताप पाता है।।

🎊🎊🎊🎊 🙏के• के•🙏🎊🎊🎊🎊

अगला लेख: भक्ति



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 सितम्बर 2019
19 सितम्बर 2019
05 अक्तूबर 2019
भगुआ वस्त्र धारण कर साधु नहीं बन कोई सकता। जीव को प्रिय है प्राण, हंता नहीं साधु बन सकताअहिंसा का पाठ तामसिक वस्त्रधारी पढ़ा नहीं सकता।सात्विक बन कर हीं कोई सच्चा साधु बन भगुआ धारण कर सकता।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
05 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
रात अभी बहुत कुछ बाकी हैरात होने को आई आधी हैलिखना बाकी अभी प्रभाती हैनक्षत्र "विशाखा" ऋतु- ''शरद" शुभकारी हैकल 'पंचमी', नक्षत्र अनुराधा, कन्या साथी हैस्वर्ण आभुषण प्रिये को देता पर प्लाटिनम-कार्ड खाली हैकवि उदास, कह लेता हूँ मृदु 'दो शब्द', कहना काफी हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
03 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★
06 अक्तूबर 2019
17 अक्तूबर 2019
सृ
साहित्य श्रिंखलाअद्भुत हैअभिव्यक्ति कीस्वतंत्रता हैसृजन में संस्कृति कीनैसर्गिक माला पिरोयेंमानववादियों को अतिशिध्रएक मंच पर लायेंडॉ. कवि कुमार निर्मल
17 अक्तूबर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
09 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
04 अक्तूबर 2019
01 अक्तूबर 2019
27 सितम्बर 2019
खि
03 अक्तूबर 2019
23 सितम्बर 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x