"साधु और साधुता"

05 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (481 बार पढ़ा जा चुका है)

"साधु और साधुता"

भगुआ वस्त्र धारण कर साधु नहीं बन कोई सकता।

जीव को प्रिय है प्राण, हंता नहीं साधु बन सकता

अहिंसा का पाठ तामसिक वस्त्रधारी पढ़ा नहीं सकता।

सात्विक बन कर हीं कोई सच्चा साधु बन भगुआ धारण कर सकता।।

डॉ. कवि कुमार निर्मल

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