श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2

07 अक्तूबर 2019   |  व्यंजना आनंद   (495 बार पढ़ा जा चुका है)

💥श्रीमद्भगवद्गीता💥

""""""""""""""""""""

* अध्याय 2 *

""""""""""""""""""

संजय बोल --------

--------------

दयायुक्त अश्रुओं से पूर्ण,

नयन में भर अर्जुन हैं खड़े ।

बताने को बातें सम्पूर्ण,

श्री भगवन अब तो बोल पड़े ।।1।।

💥

ऐसे पल में नहीं शोभती,

मोह से पूर्ण सारी बातें ।

मोह तो करें हैं क्षुद्र पुरुष ,

नरक और अपयश वो पाते ।।2।।

💥

क्लैब्य भाव को ना अपना तू,

कायरता से पूर्ण यह बात ।

इन कमजोरियों का त्याग कर

युद्ध के लिए खड़ा हो आज ।। 3।।

💥

अर्जुन बोल रहे माधव से,

पितामह पर न करूँ मैं वार ।

कैसे भेदु अपने गुरु को ,

उन पर कैसे करूँ आघात ।।4।।

💥

भिक्षा माँग जीना बेहतर ,

गुरु पर वार है पाप बड़ा ।

अर्थ, काम की खातिर होगा

रक्त से लिप्त अपराध बड़ा ।।5।।

💥💥💥💥💥

व्यंजना आनंद ✍






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बहुत बढ़िया लिखा जा रहा है. आगे बढ़ते रहिये.
वीरेंद्र

सुंदर

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