दोहा द्वादसी

11 अक्तूबर 2019   |  महातम मिश्रा   (390 बार पढ़ा जा चुका है)

विजय दशमी विशेष


"दोहा द्वादसी"


रावण के खलिहान में, चला राम का तीर।
लंका का कुल तर गया, मंदोदरी अधीर।।-1


दश दिन के संग्राम में, बीते चौदह साल।
मेघनाथ का बल गया, हुआ विभीषण लाल।।-2


कुंभकरण सोता रहा, देख भ्रात अनुराग।
सीता जी की आरती, हनुमत करते जाग।।-3


कैकेई को वर मिला, सीता को वनवास।
राम ढूढ़ते जानकी, खग मृग वन में खास।।-4


सोने की लंका बनी, शिव हैं परम फ़क़ीर।
मंशा रावण की मरी, घायल हुआ ज़मीर।।-5


तुलसी बाबा कह गए, एक नाम श्रीराम।
सात कांड जस सागरा, सुंदर कांड सु-नाम।।-6


किष्किंधा सुग्रीव का, हनुमत मुख श्रीराम।
लखन लाल सिय साथ में, कहाँ भरत सुखधाम।।-7


चरण पादुका सिर लिए, भ्राता भरत अधीर।
कैसी होंगी जानकी, कैसे लक्ष्मण वीर।।-8


कब कलंक किसको लगे, कौन सका है जान।
तुलसी सीताराम भज, माटी में सम्मान।।-9


जला जला कर थक गए, पुतला हुआ न खाक।
अर्थी भी दमदार थी, था रावण अति पाक।।-10


विजय पर्व पर खूब है, मची रावणी धूम।
ढ़ोल नगारा बंद है, है डी जे की बूम।।-11


ले लो आप बधाइयाँ, शुभकामना अनेक।
आभासी संसार ने, खोला द्वार विवेक।।-12


महातम मिश्र , गौतम गोरखपुरी

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