दर्द का रिश्ता

12 अक्तूबर 2019   |  मीना शर्मा   (463 बार पढ़ा जा चुका है)

दर्द का रिश्ता दिल से है,

और दिल का रिश्ता है तुमसे !

बरसों से भूला बिसरा,

इक चेहरा मिलता है तुमसे !


यूँ तो पीड़ाओं में मुझको,

मुस्काने की आदत है ।

काँटों से बिंधकर फूलों को,

चुन लाने की आदत है ।

पर मन के आँगन, गुलमोहर

शायद खिलता है तुमसे !

बरसों से भूला बिसरा,

इक चेहरा मिलता है तुमसे !


धूमिल से उन तारों में जब,

मेरा नाम लिखा तुम देखो,

भूरी चिड़िया के गायन में,

मेरे ही स्वर को अवरेखो !

तब बस इतना ही कह देना -

"वक्त बहलता है तुमसे" !

बरसों से भूला बिसरा,

इक चेहरा मिलता है तुमसे !


निर्मलता की उपमा से,

क्यों प्रेम मलीन करूँ अपना,

तुम जानो अपनी सीमाएँ,

मैं जानूँ, तुम हो सपना !

साथ छोड़कर मत जाना,

भटकाव सँभलता है तुमसे !

बरसों से भूला बिसरा,

इक चेहरा मिलता है तुमसे !


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अलोक सिन्हा
12 अक्तूबर 2019

यह एक और बहुत अच्छा गीत है आपका -- सरस , सुगठित , सराहनीय | इसके लिए बधाई शुभ कामनाएं दोनों |

मीना शर्मा
12 अक्तूबर 2019

आदरणीय सिन्हा जी, सादर प्रणाम। बहुत बहुत आभारी हूँ मनोबल बढ़ाने के लिए।

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