"मैं समंदर हूँ "

13 अक्तूबर 2019   |  अर्चना वर्मा   (457 बार पढ़ा जा चुका है)

 "मैं समंदर हूँ "

मैं समंदर हूँ

ऊपर से हाहाकार

पर भीतर अपनी मौज़ों

में मस्त हूँ

मैं समंदर हूँ


दूर से देखोगे तो मुझमें

उतर चढ़ाव पाओगे

पर अंदर से मुझे

शांत पाओगे

मैं निरंतर बहते रहने

में व्यस्त हूँ

मैं समंदर हूँ


ऐसा कुछ नहीं जो

मैंने भीतर छुपा रखा हो

जो मुझमे समाया

उसे डूबा रखा हो

हर बुराई बहार निकाल

देने में अभ्यस्त हूँ

मैं समंदर हूँ


हूँ विशाल इतना के

एक दुनिया है मेरे अंदर

जो आया इसमें , उसका

स्वागत है बाहें खोल कर

अपना चरित्र बनाये

रखने में मदमस्त हूँ

मैं समंदर हूँ


लोगों के लिए खारा हूँ

पर तुम बने रहो उसके

लिए सब हारा हूँ

बदले में तुमने जो

दिया उस से अब मैं

त्रस्त हूँ


मैं समंदर हूँ

ऊपर से हाहाकार

पर भीतर अपनी मौज़ों

में मस्त हूँ

मैं समंदर हूँ


अगला लेख: Archana Ki Rachna: Preview " ज़िन्दगी का उपकार "



नि:शब्द

अर्चना वर्मा
15 अक्तूबर 2019

आभार

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x