कहता होगा चाँद

17 अक्तूबर 2019   |  मीना शर्मा   (3269 बार पढ़ा जा चुका है)


जब बात मेरी तेरे कानों में कहता होगा चाँद

इस दुनिया के कितने ताने, सहता होगा चाँद...


कभी साथ में हमने-तुमने उसको जी भर देखा था

आज साथ में हमको, देखा करता होगा चाँद...


यही सोचकर बड़ी देर झोली फैलाए खड़ी रही,

पीले पत्ते सा अब, नीचे गिरता होगा चाँद...


अँबवा की डाली के पीछे, बादल के उस टुकड़े में,

छुप्पा-छुप्पी क्यों बच्चों सी, करता होगा चाँद...


मेरे जैसा कोई पागल, बंद ना कर ले मुट्ठी में,

यही सोचकर दूर-दूर, यूँ रहता होगा चाँद...

=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=

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शिल्पा रोंघे
02 नवम्बर 2019

सुंदर कविता

अलोक सिन्हा
18 अक्तूबर 2019

बहुत अच्छी रचना है | हर तरह अपने में पूर्ण | बधाई भी , शुभ कामनाएं भी |

रेणु
18 अक्तूबर 2019

कभी साथ में हमने-तुमने उसको जी भर देखा था
आज साथ में हमको, देखा करता होगा चाँद...
वाह ! बहुत ही प्यारी सरस सरल सी रचना प्रिय मीना बहन | शब्द नगरी पर आपका जलवा देखकर बहुत खुश | मेरी शुभकामनायें आपके लिए |

Sudha Devrani
17 अक्तूबर 2019

वाह!!!!

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