सृजन

17 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (415 बार पढ़ा जा चुका है)

साहित्य श्रिंखला

अद्भुत है

अभिव्यक्ति की

स्वतंत्रता है

सृजन में संस्कृति की

नैसर्गिक माला पिरोयें

मानववादियों को अतिशिध्र

एक मंच पर लायें


डॉ. कवि कुमार निर्मल

अगला लेख: खिचाव



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
20 अक्तूबर 2019
69 वें "जन्म दिन" पर मेरा शुभकारी "फलादेशसूर्य में राहु का उपद्रव- 2020 के बाद सुधार💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐कहते सुना सबसे कि मैंने खोया हीं खोया।टघरते आँसुओं की धार- पीया हीं पीया।।दिल हुआ छलनी, वज़ूद ज़ार - ज़ार हुआ।सब खोया मगर, तेरा मैं तेरा "प्यार" हुआ।।शौहरत-दौलत की- कत्तई ख़्वाहिश न थी,आफ़ताब के आग
20 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
खि
मुझसे आँख मिलाठहर सकते नहीं।आगोश में भर करझिटक सकते नहीं।।जुनून है तो सात समन्दरपार आ गले लग जाओ।वरना झूठी चकाचौंध मेंबस कर मिट जाओ।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
03 अक्तूबर 2019
23 अक्तूबर 2019
दो दिन गुजर गए-मुई ये रात भी-बीत हीं जाएगी।चलो तुम्हारीखुशबुओं से,कल की सुबह-दमक-गमक जाएगी।।रौशन शाम;महक------सराबोर कर जाएगी।ग़रीब की झोपड़ीआशियाना बन,मुहब्बत की,मिशाल बन जाएगी।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
23 अक्तूबर 2019
17 अक्तूबर 2019
सृजनात्मकतासाहित्य श्रिंखला अद्भुत हैअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हैसृजन में संस्कृति कीनैसर्गिक माला पिरोयेंमानववादियों को अतिशिध्रएक मंच पर लायेंडॉ. कवि कुमार निर्मल
17 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
लडकिया चिडिया होती हैं, पर पंख नही होते लडकियों के। मायके भी होते हैं, ससुराल भी होते हैं; पर घर नहीं होते लडकियों के। माँ-बाप कहते हैं बेटियां तो पराई हैं, ससुराल वाले कहते है कि ये पराये घर से आई हैं। भगवान! अब तु ही बता- ये बेटियां किस घर के लिए तुने बनाई हैं। <!-
09 अक्तूबर 2019
12 अक्तूबर 2019
अभी मुझे खिलते जाना है नहींअभी है पूर्ण साधना, अभी मुझे बढ़ते जाना है |जगमें नेह गन्ध फैलाते अभी मुझे खिलते जाना है ||मैं प्रथमकिरण के रथ पर चढ़ निकली थी इस निर्जन पथ पर ग्रहनक्षत्रों पर छोड़ रही अपने पदचिह्नों को अविचल |नहींप्रश्न दो चार दिवस का, मुझको बड़ी दूर जाना है जगमें नेह गन्ध फैलाते अभी मुझे खि
12 अक्तूबर 2019
19 अक्तूबर 2019
रावण हर साल जल कर राख से जी उठता हैराम का तरकश खाली हो फिर भरता रहता हैयह राम रावण का युद्ध अनवरत मन में चलता हैखूँटे से बँधा स्वतंत्र हो लक्ष्मी संग विचरण करता हैसुर्य अस्त हो नित्य आभा बिखेर आलोकित करता हैअष्ट-पाश सट्-ऋपुओं के समन हेतु हमें यज्ञ करना हैसाघना-सेवा-त्याग से दग्ध मानवता को त्राण देना
19 अक्तूबर 2019
24 अक्तूबर 2019
💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓भाषा में "साहित्य" छुपा है💓💓भाषाविद् "हित" करता है💓💓काव्य सरीता का अविरल प्रवाह💓💓"क्षिर सागर" से जा मिलता है।💓💓💓डॉ कवि कुमार निर्मल💓💓
24 अक्तूबर 2019
25 अक्तूबर 2019
धनवंतरी आयुर्वेदाचार्य मृत्युंजीवि औषधि आजीवन बाँटे।आज हम भौतिकता मे लिपट24 कैरेट का खालिस सोना चाटें।।मृत्युदेव तन की हर कोषिका-उतक में शांत छुपा सोया है।मन जीर्ण तन से ऊब कर देखोनूतन भ्रूण खोज रहा है।।लक्ष्मी अँधेरी रात्रि देख आदीपकों की माला सजवाती है।गरीब के झोपड़ में चुल्हे मेंलकड़ी भी नहीं जल प
25 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺मनुष्य के अंदर सब कुछ जाननेवाला जो बैठा है वही है भगवान्।ओत-प्रोत योग से वे हर क्षण हमारे साथ हैं।याने, हम अकेले कदापि नहीं।जब अनंत शक्तिशाली हमारे साथ हैंतो हम असहाय कैसे हो सकते हैं?डर की भावना कभी नहीं रहनी चाहिए--जैसे एक परमाणु है जिसमें एकनाभि है तथा एलेक्ट्रोन्स अपनीधूरि पर
09 अक्तूबर 2019
21 अक्तूबर 2019
ब्रह्म पूर्ण है!यह जगत् भी पूर्ण है,पूर्ण जगत् की उत्पत्तिपूर्ण ब्रह्म से हुई है!पूर्ण ब्रह्म सेपूर्ण जगत् कीउत्पत्ति होने पर भीब्रह्म की पूर्णता मेंकोई न्यूनता नहींआती!वह शेष रूप में भीपूर्ण ही रहता है,यही सनातन सत्य है!जो तत्व सदा, सर्वदा,निर्लेप, निरंजन,निर्विकार और सदैवस्वरूप में स्थित रहताहै उस
21 अक्तूबर 2019
15 अक्तूबर 2019
आवारा मन की आवाज़....!_______________________________मैं आवारा हूँ, ये आवारा मन की आवाज़ हैकालकोठरी से भागा, जैसे ये सोया साज़ हैदिशाहीन कोरे पन्नों सा, आसमान का बिखरा तारातपोभ्रष्ट का हूँ मैं मनीषी, घूमूँ बनके बंजाराडूबा खारे सागर में, तट की रेतों से डरा-डराजुड़-जुड़ के भी टूट रहा, लहरों से मैं घिर
15 अक्तूबर 2019
12 अक्तूबर 2019
दर्द का रिश्ता दिल से है,और दिल का रिश्ता है तुमसे !बरसों से भूला बिसरा,इक चेहरा मिलता है तुमसे !यूँ तो पीड़ाओं में मुझको,मुस्काने की आदत है ।काँटों से बिंधकर फूलों को,चुन लाने की आदत है ।पर मन के आँगन, गुलमोहरशायद खिलता है तुमसे !बरसों
12 अक्तूबर 2019
05 अक्तूबर 2019
भगुआ वस्त्र धारण कर साधु नहीं बन कोई सकता। जीव को प्रिय है प्राण, हंता नहीं साधु बन सकताअहिंसा का पाठ तामसिक वस्त्रधारी पढ़ा नहीं सकता।सात्विक बन कर हीं कोई सच्चा साधु बन भगुआ धारण कर सकता।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
05 अक्तूबर 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x