सृजन

17 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (423 बार पढ़ा जा चुका है)

साहित्य श्रिंखला

अद्भुत है

अभिव्यक्ति की

स्वतंत्रता है

सृजन में संस्कृति की

नैसर्गिक माला पिरोयें

मानववादियों को अतिशिध्र

एक मंच पर लायें


डॉ. कवि कुमार निर्मल

अगला लेख: खिचाव



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 अक्तूबर 2019
सुधी पाठकों के लिए प्रस्तुत है मेरी ही एक पुरानी रचना....पुष्प बनकर क्या करूँगी, पुष्पका सौरभ मुझे दो |दीप बनकर क्या करूँगी, दीप का आलोक दे दो ||हर नयन में देखना चाहूँ अभय मैं,हर भवन में बाँटना चाहूँ हृदय मैं |बंध सके ना वृन्त डाल पात से जो,थक सके ना धूप वारि वात से जो |भ्रमर बनकर क्या करू
09 अक्तूबर 2019
21 अक्तूबर 2019
ब्रह्म पूर्ण है!यह जगत् भी पूर्ण है,पूर्ण जगत् की उत्पत्तिपूर्ण ब्रह्म से हुई है!पूर्ण ब्रह्म सेपूर्ण जगत् कीउत्पत्ति होने पर भीब्रह्म की पूर्णता मेंकोई न्यूनता नहींआती!वह शेष रूप में भीपूर्ण ही रहता है,यही सनातन सत्य है!जो तत्व सदा, सर्वदा,निर्लेप, निरंजन,निर्विकार और सदैवस्वरूप में स्थित रहताहै उस
21 अक्तूबर 2019
15 अक्तूबर 2019
आवारा मन की आवाज़....!_______________________________मैं आवारा हूँ, ये आवारा मन की आवाज़ हैकालकोठरी से भागा, जैसे ये सोया साज़ हैदिशाहीन कोरे पन्नों सा, आसमान का बिखरा तारातपोभ्रष्ट का हूँ मैं मनीषी, घूमूँ बनके बंजाराडूबा खारे सागर में, तट की रेतों से डरा-डराजुड़-जुड़ के भी टूट रहा, लहरों से मैं घिर
15 अक्तूबर 2019
17 अक्तूबर 2019
सृजनात्मकतासाहित्य श्रिंखला अद्भुत हैअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हैसृजन में संस्कृति कीनैसर्गिक माला पिरोयेंमानववादियों को अतिशिध्रएक मंच पर लायेंडॉ. कवि कुमार निर्मल
17 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺मनुष्य के अंदर सब कुछ जाननेवाला जो बैठा है वही है भगवान्।ओत-प्रोत योग से वे हर क्षण हमारे साथ हैं।याने, हम अकेले कदापि नहीं।जब अनंत शक्तिशाली हमारे साथ हैंतो हम असहाय कैसे हो सकते हैं?डर की भावना कभी नहीं रहनी चाहिए--जैसे एक परमाणु है जिसमें एकनाभि है तथा एलेक्ट्रोन्स अपनीधूरि पर
09 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★
06 अक्तूबर 2019
12 अक्तूबर 2019
आओ बैठे आज फिर साथज़िंदगी की किताब के कुछ पन्ने फिर पलटेंकुछ अफ़साने तुम कहोकुछ क़िस्से हम सुनायेंकुछ लम्हे तुम जियो कुछ पल हम दोहराएँकुछ भूली हुई यादें,तुम ताज़ा करो कुछ स्मृतियाँ हम संजोयें कुछ क़समें तुम तोड़ो कुछ वादों से हम मुकरेंकुछ दूरियाँ तुम मिटाओकुछ फ़ासले हम तय करेंकुछ नज़दीक तुम आओ कुछ क
12 अक्तूबर 2019
12 अक्तूबर 2019
अभी मुझे खिलते जाना है नहींअभी है पूर्ण साधना, अभी मुझे बढ़ते जाना है |जगमें नेह गन्ध फैलाते अभी मुझे खिलते जाना है ||मैं प्रथमकिरण के रथ पर चढ़ निकली थी इस निर्जन पथ पर ग्रहनक्षत्रों पर छोड़ रही अपने पदचिह्नों को अविचल |नहींप्रश्न दो चार दिवस का, मुझको बड़ी दूर जाना है जगमें नेह गन्ध फैलाते अभी मुझे खि
12 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
लडकिया चिडिया होती हैं, पर पंख नही होते लडकियों के। मायके भी होते हैं, ससुराल भी होते हैं; पर घर नहीं होते लडकियों के। माँ-बाप कहते हैं बेटियां तो पराई हैं, ससुराल वाले कहते है कि ये पराये घर से आई हैं। भगवान! अब तु ही बता- ये बेटियां किस घर के लिए तुने बनाई हैं। <!-
09 अक्तूबर 2019
20 अक्तूबर 2019
69 वें "जन्म दिन" पर मेरा शुभकारी "फलादेशसूर्य में राहु का उपद्रव- 2020 के बाद सुधार💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐कहते सुना सबसे कि मैंने खोया हीं खोया।टघरते आँसुओं की धार- पीया हीं पीया।।दिल हुआ छलनी, वज़ूद ज़ार - ज़ार हुआ।सब खोया मगर, तेरा मैं तेरा "प्यार" हुआ।।शौहरत-दौलत की- कत्तई ख़्वाहिश न थी,आफ़ताब के आग
20 अक्तूबर 2019
13 अक्तूबर 2019
मि
कोई तकदीर से मिलते हैं तो कोई दुआ से कोई चाहत से मिलते हैं तो कोई तकरार से कोई कोशिश से मिलते हैं तो कोई मजबूरी से ज़िन्दगी की राहों में मिलना तो तै हैं चाहे वो कैसे भी हो. ...
13 अक्तूबर 2019
03 अक्तूबर 2019
रात अभी बहुत कुछ बाकी हैरात होने को आई आधी हैलिखना बाकी अभी प्रभाती हैनक्षत्र "विशाखा" ऋतु- ''शरद" शुभकारी हैकल 'पंचमी', नक्षत्र अनुराधा, कन्या साथी हैस्वर्ण आभुषण प्रिये को देता पर प्लाटिनम-कार्ड खाली हैकवि उदास, कह लेता हूँ मृदु 'दो शब्द', कहना काफी हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
03 अक्तूबर 2019
17 अक्तूबर 2019
सृजनात्मकतासाहित्य श्रिंखला अद्भुत हैअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हैसृजन में संस्कृति कीनैसर्गिक माला पिरोयेंमानववादियों को अतिशिध्रएक मंच पर लायेंडॉ. कवि कुमार निर्मल
17 अक्तूबर 2019
04 अक्तूबर 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves></w:TrackM
04 अक्तूबर 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x