सृजनात्मकता

17 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (3293 बार पढ़ा जा चुका है)

सृजनात्मकता

सृजनात्मकता


साहित्य श्रिंखला अद्भुत है

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है

सृजन में संस्कृति की

नैसर्गिक माला पिरोयें

मानववादियों को अतिशिध्र

एक मंच पर लायें


डॉ. कवि कुमार निर्मल



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06 अक्तूबर 2019
★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★
06 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
सुधी पाठकों के लिए प्रस्तुत है मेरी ही एक पुरानी रचना....पुष्प बनकर क्या करूँगी, पुष्पका सौरभ मुझे दो |दीप बनकर क्या करूँगी, दीप का आलोक दे दो ||हर नयन में देखना चाहूँ अभय मैं,हर भवन में बाँटना चाहूँ हृदय मैं |बंध सके ना वृन्त डाल पात से जो,थक सके ना धूप वारि वात से जो |भ्रमर बनकर क्या करू
09 अक्तूबर 2019
24 अक्तूबर 2019
💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓भाषा में "साहित्य" छुपा है💓💓भाषाविद् "हित" करता है💓💓काव्य सरीता का अविरल प्रवाह💓💓"क्षिर सागर" से जा मिलता है।💓💓💓डॉ कवि कुमार निर्मल💓💓
24 अक्तूबर 2019
15 अक्तूबर 2019
आवारा मन की आवाज़....!_______________________________मैं आवारा हूँ, ये आवारा मन की आवाज़ हैकालकोठरी से भागा, जैसे ये सोया साज़ हैदिशाहीन कोरे पन्नों सा, आसमान का बिखरा तारातपोभ्रष्ट का हूँ मैं मनीषी, घूमूँ बनके बंजाराडूबा खारे सागर में, तट की रेतों से डरा-डराजुड़-जुड़ के भी टूट रहा, लहरों से मैं घिर
15 अक्तूबर 2019
18 अक्तूबर 2019
🌹🌹🌹🌹🌹🌹मन बनाया है आज,तुम्हें जैसे भी हो, मना लूँ।दीपवाली के नावें,सारी रात रौशन कर निकाल दूँ!सुबह की खुमारी पुरजोर,गुस्ताखी कोई है मुमक़िऩचुप रहना जरा आज भर,ग़ुजारिस है- तोहफ़ों को बाँट दूँ!!🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷नज़रों का दोष कहें कि मुकद्दर का सौदागर।हर नज़्म लग रहीं है उनको, उम्दा बहर।।🌴
18 अक्तूबर 2019
20 अक्तूबर 2019
69 वें "जन्म दिन" पर मेरा शुभकारी "फलादेशसूर्य में राहु का उपद्रव- 2020 के बाद सुधार💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐कहते सुना सबसे कि मैंने खोया हीं खोया।टघरते आँसुओं की धार- पीया हीं पीया।।दिल हुआ छलनी, वज़ूद ज़ार - ज़ार हुआ।सब खोया मगर, तेरा मैं तेरा "प्यार" हुआ।।शौहरत-दौलत की- कत्तई ख़्वाहिश न थी,आफ़ताब के आग
20 अक्तूबर 2019
17 अक्तूबर 2019
सृ
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17 अक्तूबर 2019
12 अक्तूबर 2019
दर्द का रिश्ता दिल से है,और दिल का रिश्ता है तुमसे !बरसों से भूला बिसरा,इक चेहरा मिलता है तुमसे !यूँ तो पीड़ाओं में मुझको,मुस्काने की आदत है ।काँटों से बिंधकर फूलों को,चुन लाने की आदत है ।पर मन के आँगन, गुलमोहरशायद खिलता है तुमसे !बरसों
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03 अक्तूबर 2019
रात अभी बहुत कुछ बाकी हैरात होने को आई आधी हैलिखना बाकी अभी प्रभाती हैनक्षत्र "विशाखा" ऋतु- ''शरद" शुभकारी हैकल 'पंचमी', नक्षत्र अनुराधा, कन्या साथी हैस्वर्ण आभुषण प्रिये को देता पर प्लाटिनम-कार्ड खाली हैकवि उदास, कह लेता हूँ मृदु 'दो शब्द', कहना काफी हैडॉ. कवि कुमार निर्मल
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25 अक्तूबर 2019
धनवंतरी आयुर्वेदाचार्य मृत्युंजीवि औषधि आजीवन बाँटे।आज हम भौतिकता मे लिपट24 कैरेट का खालिस सोना चाटें।।मृत्युदेव तन की हर कोषिका-उतक में शांत छुपा सोया है।मन जीर्ण तन से ऊब कर देखोनूतन भ्रूण खोज रहा है।।लक्ष्मी अँधेरी रात्रि देख आदीपकों की माला सजवाती है।गरीब के झोपड़ में चुल्हे मेंलकड़ी भी नहीं जल प
25 अक्तूबर 2019
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09 अक्तूबर 2019
लडकिया चिडिया होती हैं, पर पंख नही होते लडकियों के। मायके भी होते हैं, ससुराल भी होते हैं; पर घर नहीं होते लडकियों के। माँ-बाप कहते हैं बेटियां तो पराई हैं, ससुराल वाले कहते है कि ये पराये घर से आई हैं। भगवान! अब तु ही बता- ये बेटियां किस घर के लिए तुने बनाई हैं। <!-
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09 अक्तूबर 2019
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺मनुष्य के अंदर सब कुछ जाननेवाला जो बैठा है वही है भगवान्।ओत-प्रोत योग से वे हर क्षण हमारे साथ हैं।याने, हम अकेले कदापि नहीं।जब अनंत शक्तिशाली हमारे साथ हैंतो हम असहाय कैसे हो सकते हैं?डर की भावना कभी नहीं रहनी चाहिए--जैसे एक परमाणु है जिसमें एकनाभि है तथा एलेक्ट्रोन्स अपनीधूरि पर
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05 अक्तूबर 2019
भगुआ वस्त्र धारण कर साधु नहीं बन कोई सकता। जीव को प्रिय है प्राण, हंता नहीं साधु बन सकताअहिंसा का पाठ तामसिक वस्त्रधारी पढ़ा नहीं सकता।सात्विक बन कर हीं कोई सच्चा साधु बन भगुआ धारण कर सकता।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
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