सृजनात्मकता

17 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (3261 बार पढ़ा जा चुका है)

सृजनात्मकता

सृजनात्मकता


साहित्य श्रिंखला अद्भुत है

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है

सृजन में संस्कृति की

नैसर्गिक माला पिरोयें

मानववादियों को अतिशिध्र

एक मंच पर लायें


डॉ. कवि कुमार निर्मल



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17 अक्तूबर 2019
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17 अक्तूबर 2019
18 अक्तूबर 2019
🌹🌹🌹🌹🌹🌹मन बनाया है आज,तुम्हें जैसे भी हो, मना लूँ।दीपवाली के नावें,सारी रात रौशन कर निकाल दूँ!सुबह की खुमारी पुरजोर,गुस्ताखी कोई है मुमक़िऩचुप रहना जरा आज भर,ग़ुजारिस है- तोहफ़ों को बाँट दूँ!!🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷नज़रों का दोष कहें कि मुकद्दर का सौदागर।हर नज़्म लग रहीं है उनको, उम्दा बहर।।🌴
18 अक्तूबर 2019
20 अक्तूबर 2019
69 वें "जन्म दिन" पर मेरा शुभकारी "फलादेशसूर्य में राहु का उपद्रव- 2020 के बाद सुधार💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐कहते सुना सबसे कि मैंने खोया हीं खोया।टघरते आँसुओं की धार- पीया हीं पीया।।दिल हुआ छलनी, वज़ूद ज़ार - ज़ार हुआ।सब खोया मगर, तेरा मैं तेरा "प्यार" हुआ।।शौहरत-दौलत की- कत्तई ख़्वाहिश न थी,आफ़ताब के आग
20 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺मनुष्य के अंदर सब कुछ जाननेवाला जो बैठा है वही है भगवान्।ओत-प्रोत योग से वे हर क्षण हमारे साथ हैं।याने, हम अकेले कदापि नहीं।जब अनंत शक्तिशाली हमारे साथ हैंतो हम असहाय कैसे हो सकते हैं?डर की भावना कभी नहीं रहनी चाहिए--जैसे एक परमाणु है जिसमें एकनाभि है तथा एलेक्ट्रोन्स अपनीधूरि पर
09 अक्तूबर 2019
04 अक्तूबर 2019
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04 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
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संपादन का विकल्प नहीं मिल रहा, हठात लिखी रचना वा डाली छवि में संशोधनार्थ?
09 अक्तूबर 2019
06 अक्तूबर 2019
★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★
06 अक्तूबर 2019
23 अक्तूबर 2019
दो दिन गुजर गए-मुई ये रात भी-बीत हीं जाएगी।चलो तुम्हारीखुशबुओं से,कल की सुबह-दमक-गमक जाएगी।।रौशन शाम;महक------सराबोर कर जाएगी।ग़रीब की झोपड़ीआशियाना बन,मुहब्बत की,मिशाल बन जाएगी।।डॉ. कवि कुमार निर्मल
23 अक्तूबर 2019
24 अक्तूबर 2019
💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓भाषा में "साहित्य" छुपा है💓💓भाषाविद् "हित" करता है💓💓काव्य सरीता का अविरल प्रवाह💓💓"क्षिर सागर" से जा मिलता है।💓💓💓डॉ कवि कुमार निर्मल💓💓
24 अक्तूबर 2019
09 अक्तूबर 2019
लडकिया चिडिया होती हैं, पर पंख नही होते लडकियों के। मायके भी होते हैं, ससुराल भी होते हैं; पर घर नहीं होते लडकियों के। माँ-बाप कहते हैं बेटियां तो पराई हैं, ससुराल वाले कहते है कि ये पराये घर से आई हैं। भगवान! अब तु ही बता- ये बेटियां किस घर के लिए तुने बनाई हैं। <!-
09 अक्तूबर 2019
25 अक्तूबर 2019
धनवंतरी आयुर्वेदाचार्य मृत्युंजीवि औषधि आजीवन बाँटे।आज हम भौतिकता मे लिपट24 कैरेट का खालिस सोना चाटें।।मृत्युदेव तन की हर कोषिका-उतक में शांत छुपा सोया है।मन जीर्ण तन से ऊब कर देखोनूतन भ्रूण खोज रहा है।।लक्ष्मी अँधेरी रात्रि देख आदीपकों की माला सजवाती है।गरीब के झोपड़ में चुल्हे मेंलकड़ी भी नहीं जल प
25 अक्तूबर 2019
19 अक्तूबर 2019
रावण हर साल जल कर राख से जी उठता हैराम का तरकश खाली हो फिर भरता रहता हैयह राम रावण का युद्ध अनवरत मन में चलता हैखूँटे से बँधा स्वतंत्र हो लक्ष्मी संग विचरण करता हैसुर्य अस्त हो नित्य आभा बिखेर आलोकित करता हैअष्ट-पाश सट्-ऋपुओं के समन हेतु हमें यज्ञ करना हैसाघना-सेवा-त्याग से दग्ध मानवता को त्राण देना
19 अक्तूबर 2019
27 अक्तूबर 2019
दीपवाली में 'मन' माना दूर,मंदीर अलग-अलग चमकते हैं!चंचल लक्ष्मी ठम- खड़ी दूर,हृदयहीन के घर-आँगन सजते हैं!!निर्मल
27 अक्तूबर 2019
13 अक्तूबर 2019
मि
कोई तकदीर से मिलते हैं तो कोई दुआ से कोई चाहत से मिलते हैं तो कोई तकरार से कोई कोशिश से मिलते हैं तो कोई मजबूरी से ज़िन्दगी की राहों में मिलना तो तै हैं चाहे वो कैसे भी हो. ...
13 अक्तूबर 2019
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